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बुजुर्ग को आया स्ट्रोक, मुंबई पुलिस समझती रही नशेड़ी! 5 घंटे थाने में बैठाया, अब खतरे में जान| Navbharat Live

July 30, 2026

Updated On: Jul 30, 2026 | 04:29 PM IST

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सार

Stroke Patient Police Negligence Case: मुंबई में कार चलाते समय स्ट्रोक आने से अनियंत्रित हुई कार के बाद पुलिस ने 73 वर्षीय बुजुर्ग को शराबी समझकर 5 घंटे थाने में बैठाया। अब बुजुर्ग की जान खतरे में है।

Stroke Patient Versova Police Negligence Case

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)

विस्तार

Versova Police Negligence Case: मुंबई की वर्सोवा पुलिस की खौफनाक लापरवाही का मामला सामने आया है। कार चलाते समय अचानक ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हुए एक 73 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यवसायी को पुलिस ने शराब के नशे में समझ लिया और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाने के बजाय करीब पांच घंटे तक थाने में बैठाए रखा। परिजनों का गंभीर आरोप है कि पुलिस की इस लापरवाही और इलाज में हुई पांच घंटे की देरी के कारण बुजुर्ग के शरीर का दाहिना हिस्सा हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

मुंबई के वर्सोवा इलाके के निवासी सेवानिवृत्त व्यवसायी शरद कदम को कार चलाते समय अचानक स्ट्रोक आया। इससे उनकी कार अनियंत्रित होकर दूसरी कार से टकरा गई। परिवार का कहना है कि स्ट्रोक के कारण उनकी आवाज लड़खड़ा रही थी, लेकिन पुलिस ने इसे शराब के नशे का असर मान लिया।

बुजुर्ग के शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त

परिजनों का आरोप है कि मुंबई पुलिस ने मौके पर न तो ब्रेथलाइजर टेस्ट कराया और न ही तत्काल अस्पताल पहुंचाया। इसके बजाय उन्हें वर्सोवा पुलिस स्टेशन ले जाकर करीब पांच घंटे तक बैठाए रखा। बाद में उन्हें कूपर अस्पताल ले जाया गया, जहां से रात करीब 8 बजे नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां जांच में स्ट्रोक की पुष्टि हुई। परिवार का दावा है कि इलाज में हुई देरी के कारण उनके शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।

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शराब पीकर वाहन चलाने का मामला दर्ज

वर्सोवा पुलिस ने एक कांस्टेबल की शिकायत पर शरद कदम के खिलाफ लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना और कथित रूप से नशे की हालत में वाहन चलाने का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर उनसे शराब की गंध आ रही थी। रक्त में अल्कोहल की जांच के लिए उनका सैंपल लिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार है।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

अंधेरी पश्चिम के पार्षद एवं शरद कदम के भतीजे रोहन राठौड़ ने आरोप लगाया कि पुलिस और घटनास्थल पर मौजूद एक डॉक्टर ने स्ट्रोक के स्पष्ट लक्षणों की अनदेखी की। उनका कहना है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने पर अड़ी रही और समय पर चिकित्सा सहायता नहीं दी। उन्होंने दावा किया कि यदि तत्काल इलाज मिलता तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता था।

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विधायक अमित साटम ने पुलिस ने मांगा जवाब

इस मामले को लेकर भाजपा विधायक अमित साटम ने डीसीपी पुरुषोत्तम कराड को पत्र लिखकर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने वर्सोवा पुलिस स्टेशन की वरिष्ठ निरीक्षक से यह भी पूछा है कि बुजुर्ग को तत्काल चिकित्सा सहायता क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई।

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