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केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि चिंताजनक मोड़ पर पहुंची: झारखंड को केंद्र से 4 माह में 6000 करोड़ मिलने थे, मिले सिर्फ 134 करोड़ - Ranchi News

September 11, 2026

केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि चिंताजनक मोड़ पर पहुंची:झारखंड को केंद्र से 4 माह में 6000 करोड़ मिलने थे, मिले सिर्फ 134 करोड़

रांची17 मिनट पहलेलेखक: ‌ ‌अमरेंद्र कुमार

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झारखंड को केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गई है। चालू वित्त वर्ष में केंद्र से 18,274 करोड़ रुपए मिलने पर सहमति बनी थी। मगर चार महीने में सिर्फ 134 करोड़ रुपए ही मिले हैं।

जबकि इस चार महीने में कम से कम 6000 करोड़ रुपए मिलना चाहिए थे। पिछले 10 सालों से केंद्रीय सहायता में लगातार कटौती हो रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में 17 हजार करोड़ की जगह सिर्फ 11 हजार करोड़ रुपए ही मिले थे।

केंद्रीय सहायता राशि न मिलने का असर कई योजनाओं पर पड़ा है। मिड-डे मील, कल्याण छात्रवृत्ति, मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा, स्वस्थ भारत मिशन, जल-जीवन मिशन, पुलिस आधुनिकीकरण, आपदा प्रबंधन और पारा शिक्षकों का भुगतान प्रभावित हो रहा है। इसका प्रभाव योजना खर्च पर भी पड़ा है। चार महीने में सिर्फ 18.52% राशि ही खर्च हो सकी है।

विकास के लिए केंद्रीय सहायता और केंद्र प्रायोजित योजना के तहत चलने वाली योजनाएं प्रभावित होने का एक बड़ा कारण राज्य की योजना के लिए मिलने वाले केंद्रांश और केंद्र प्रायोजित योजना की राशि का समय से नहीं मिलना भी है।

पैसे न मिलने से ये योजनाएं प्रभावित

  • स्वास्थ्य विभाग : स्वास्थ्य विभाग के लिए केंद्रीय सहायता और केंद्र प्रायोजित योजना के लिए 2000 करोड़ रुपए देने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक 90 करोड़ रुपए ही मिले हैं। इससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत योजना, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम, एड्स नियंत्रण कार्यक्रम, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और स्वास्थ्य बीमा योजना प्रभावित हो रही है।
  • ग्रामीण कार्य विभाग : ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 900 करोड़ केंद्र से मिलना है। इसमें से अब तक 20 करोड रुपए ही मिले हैं। इससे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना समेत कई योजना प्रभावित है।
  • कल्याण विभाग : कल्याण विभाग के लिए 1200 करोड़ रुपए केंद्र से मिलना है। इसमें से अब तक 30 करोड़ करोड़ रुपए ही मिले है। इससे बिरसा योजना प्रभावित है। जा रही है।
  • शिक्षा विभाग : स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के लिए 2300 करोड की जगह 50 करोड़ रुपए भी नहीं मिले। इससे पोशाक, मिड-डे मिल का काम प्रभावित हो रहा है।
  • पेयजल स्वच्छता विभाग : पेयजल स्वच्छता विभाग में जल जीवन मिशन शहरी और ग्रामीण के लिए केंद्र से 1400 करोड़ रुपए मिलने हैं। अब तक कुछ नहीं मिला है।

भास्कर एक्सपर्ट - सत्यनारायण प्रसाद, पूर्व उप निदेशक बजट

नियंत्रित राजकोषीय घाटा अनियंत्रित हो सकता है

राज्य सरकार को प्रतिमाह अपने प्रतिबद्ध दायित्वों (वेतन,पेंशन एवं ब्याज) के भुगतान में लगभग 3000 करोड़ खर्च करना पड़ता है। इसमें कार्यालय व अन्य खर्च जोड़ें तो करीब 3500 करोड़ होता है। भारत सरकार से सहायता अनुदान समय पर न मिलने से केंद्र प्रायोजित योजना पर राज्य सरकार को अपने संसाधनों से खर्च करना पड़ता है।

मनरेगा ,वृद्धा पेंशन, मिड-डे मील, शहरी/ग्रामीण जलापूर्ति योजना जैसे अन्य फ्लैगशिप स्कीम, जो सामान्य जन के रोजमर्रा से सम्बद्ध होता है, राज्य सरकार को केन्द्रांश की प्राप्ति की प्रत्याशा में व्यय करना पड़ता है। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो राज्य सरकार को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ माह और यही स्थिति रही तो राज्य का राजकोषीय घाटा भी, जो कुछ वर्षों से लगातार नियंत्रित रहा है, अनियंत्रित हो सकता है।

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