सीवान के बड़हरिया प्रखंड की सदरपुर पंचायत स्थित पुस्तकालय भवन परिसर में जीपीडीपी 2027-28 को लेकर आयोजित ग्राम सभा ग्रामीणों के विरोध के चलते आगे नहीं बढ़ सकी।
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आवास योजना की सूची से करीब तीन सौ लोगों के नाम गायब होने और ग्राम सभा में संबंधित प्रशासनिक पदाधिकारी की मौजूदगी नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
ग्रामीणों ने अधिकारी की मौजूदगी में ग्राम सभा कराने की मांग करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।
ग्रामीणों का कहना था कि पंचायत स्तर पर महत्वपूर्ण योजनाओं और आमसभा की जानकारी लोगों को समय पर नहीं दी जाती।


विकास योजनाओं पर नहीं हो सकी विस्तृत चर्चा
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुखिया पर पंचायत की कार्यप्रणाली में मनमानी करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि आवास योजना की सूची में योग्य लाभुकों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पात्र लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं किए जाते, तब तक ग्राम सभा की कार्यवाही का विरोध जारी रहेगा।
हंगामे और बहिष्कार के कारण जीपीडीपी के तहत प्रस्तावित विकास योजनाओं पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
ग्रामीण पुस्तकालय भवन के बाहर जुटे रहे और आवास सूची में पात्र लोगों के नाम शामिल करने की मांग करते रहे।
प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी की मौजूदगी नहीं मिली
मामले में पंचायत के मुखिया रविशंकर यादव पप्पू ने कहा कि सूची से जिन लोगों के नाम हटे हैं, उन्हें प्रस्ताव में शामिल किया गया।
हालांकि,ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुखिया के इस दावे पर आपत्ति जताते हुए पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत में योजनाओं से जुड़ी जानकारी पारदर्शी तरीके से लोगों तक नहीं पहुंचाई जाती।
मामला तब और गंभीर हो गया जब ग्राम सभा की निगरानी के लिए प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी की मौजूदगी नहीं मिली।
विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार
प्रखंड विकास पदाधिकारी संदीप कुमार से इस संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने ग्राम सभा की जानकारी होने से इनकार करते हुए मुखिया से बात करने की बात कही।
बीडीओ का यह जवाब प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले की पड़ताल में यह भी सामने आया कि सदरपुर पंचायत की ग्राम सभा के लिए प्रखंड स्तर से किसी अधिकारी को नामित नहीं किया गया था।
ऐसे में ग्राम सभा की प्रक्रिया की प्रशासनिक निगरानी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही। ग्रामीणों ने इसी व्यवस्था का विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा महज औपचारिकता पूरी करने का माध्यम नहीं हो सकती। पंचायत की योजनाओं, लाभुकों की सूची और विकास कार्यों में पारदर्शिता के साथ आम लोगों की भागीदारी जरूरी है।
सदरपुर में ग्राम सभा का बहिष्कार पंचायत स्तर पर उठे इन्हीं सवालों और प्रशासनिक निगरानी की कमी का परिणाम बनकर सामने आया।