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चुनाव आयोग पर शिकंजा कसने की तैयारी! सुप्रीम कोर्ट में 3 तरफ से खुला मोर्चा

October 13, 2026

चुनाव आयोग पर शिकंजा कसने की तैयारी! सुप्रीम कोर्ट में 3 तरफ से खुला मोर्चा

सुप्रीम कोर्ट में 3 तरफ से खुला मोर्चा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मचे बवाल के बीच चुनाव आयोग पर शिकंजा कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट में तीन तरफ से मोर्चा खोला गया है. पहला मोर्चा लोक प्रहरी नामक संस्था की ओर से खोला गया है. संस्था ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को चुनौती दी है. इस याचिका पर पांच जजों की बेंच में सुनवाई होनी है. दूसरा मोर्चा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से खोला गया है. संस्था ने एक याचिका दाखिल कर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण को चुनौती दी है.

तीसरा मोर्चा विपक्ष की ओर से खोला गया है. राहुल गांधी समेत विपक्ष के 11 नेताओं ने सोमवार (12 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की. इसमें चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है.

चुनाव आयोग पर शिकंजा कसने की तैयारी?

जिस तरह लगातार तीन मामलों में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं, उससे सवाल उठ रहा है कि क्या इन याचिकाओं के जरिए चुनाव आयोग पर शिकंजा कसने की तैयारी हो रही है?

दूसरी तरफ, बवाल के बीच चुनाव आयोग ने पिछले 30 दिनों में अपने ही पांच बड़े फैसले बदल लिए हैं. सभी 5 यूटर्न की डिटेल यहां पढ़िए…

1. आजीवन सुरक्षा को लेकर एडीआर की याचिका

एडीआर ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को मिली सुरक्षा को लेकर याचिका दायर की गई है. इस याचिका में कहा गया है कि भारत के संविधान या किसी अन्य कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो आजीवन, सद्भावना से रहित, किसी भी प्रतिबंध तंत्र से मुक्त और बिना किसी बचाव खंड के प्रतिरक्षा प्रदान करता हो.

याचिका के मुताबिक यह संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है. इसे रद्द करने की मांग की गई है. पिछले हफ्ते एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जे बागची ने टिप्पणी की थी- ऐसी सुरक्षा जजों को भी नहीं मिली हुई है.

दरअसल, 2023 में जो चुनाव आयोग को लेकर संसद से जो कानून पास कराया गया था, उसमें कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त पर पद पर रहने के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर किसी भी तरह का केस नहीं चलाया जा सकता है.

यह अहम क्यों है- यह फैसला चुनाव आयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है. हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि इस नियम के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त दोनों ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिसका लाभ किसी विशेष पार्टी को हो रहा है.

2. नियुक्ति को लेकर लोक प्रहरी की याचिका

लोक प्रहरी नामक संस्था ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है। इस पर पांच जजों की बेंच में सुनवाई होनी है. याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के मामले में अनूप बरनवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू किया जाए.

दरअसल, अनूप बरनवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों. हालांकि, मौजूदा कानून के मुताबिक, इस तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) शामिल होते हैं.

यह अहम क्यों है?- हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के जज दीपांकर दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 3 सदस्यीय नियुक्ति टीम में अगर सरकार के 2 लोग होंगे, तो यह नियुक्ति निष्पक्ष कैसे हो सकती है?

3. फैसले को लेकर राहुल की याचिका

राहुल गांधी समेत विपक्ष के 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेते समय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. इस याचिका में चुनाव आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है.

दरअसल, अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 10 महीने के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्तियां जताईं। दोनों आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े फैसलों पर भी आपत्ति जताई थी. इस तरह की 2 याचिकाएं पहले से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्टेड है.

यह अहम क्यों है?- इसी मामले को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी के निशाने पर हैं. अगर इस मामले में उनकी भूमिका गलत पाई जाती है, तो उन पर नैतिक आधार पर पद छोड़ने का दबाव बन सकता है.

अविनीश कुमार मिश्रा

अविनीश कुमार मिश्रा

अविनीश मिश्रा 2019 से सक्रिय पत्रकारिता में हैं. इस वक्त टीवी-9 भारतवर्ष में स्पेशल कंटेंट टीम को लीड कर रहे हैं. यह टीम टीवी-9 की हिंदी वेबसाइट, यूट्यूब और क्षेत्रीय भाषाओं के लिए स्पेशल कंटेंट तैयार करती है. स्पेशल टीम में डेटा, एनालिसिस, डेप्थ स्टोरी और एक्सपर्ट व्यू के साथ स्टोरी तैयार की जाती है. भारतीय राजनीति, सुप्रीम कोर्ट, वर्ल्ड, सोशल इश्यू, कृषि और डेवलपमेंट और डेटा जैसे विषयों पर अविनीश की मजबूत पकड़ है. खबर की इनसाइड स्टोरी बताने का हुनर भी रखते हैं. कभी-कभी इंटरव्यू भी कर लेते हैं. टीवी-9 भारतवर्ष से पहले अविनीश एबीपी न्यूज, दैनिक भास्कर और प्रभात खबर में काम कर चुके हैं. इस दौरान 2 लोकसभा और 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव ग्राउंड पर जाकर कवर किए. इन राज्यों की भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं. पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो भोपाल के माखनलाल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद अविनीश ने दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से साल 2018-19 में हिंदी पत्रकारिता की डिग्री हासिल की.हिंदी के अलावा अंग्रेजी, बांग्ला, मैथिली और भोजपुरी भाषा जानते और बोलते हैं. नई दिल्ली में रहने वाले अविनीश पुरानी दिल्ली के खाने के शौकीन हैं. फ्री टाइम में खुरापाती दिमाग को शांत रखने के लिए किताब पढ़ते हैं.

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