Delhi Jal Board Scam: दिल्ली जल बोर्ड घोटाला मामले में सत्येंद्र जैन की बेल पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 सितंबर तक फैसला सुरक्षित रख लिया है।
डीजेबी घोटाले मामले में सत्येंद्र जैन की बेल पर फैसला 3 सितंबर तक सुरक्षित।
- Published: 25 Aug 2026, 04:05 PM IST
- Last Updated: 25 Aug 2026, 04:05 PM IST
Delhi Jal Board Scam: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के कथित STP टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी पर फैसला 3 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय जैन ने ‘सत्यमेव जयते’ कहा।
स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने मंगलवार को सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। जैन के अलावा मामले के आरोपी पंकज वर्मा, पूर्व IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय और राज कुमार कुर्रा भी सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहे।
दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने DJB के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के मामले में सत्येंद्र जैन, DJB के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में DJB के पूर्व सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, नागेंद्र यादव, राज कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा शामिल हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होंगे उदित प्रकाश राय
अदालत ने उदित प्रकाश राय की 3 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अपील भी मंजूर कर ली। राय ने अदालत को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और क्लॉस्ट्रोफोबिया की शिकायत के बारे में बताया था। जमानत पर बहस के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और अधिवक्ता विवेक जैन ने गिरफ्तारी की जरूरत पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि मई 2024 में FIR दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद ACB ने जैन को गिरफ्तार किया, जबकि वह जांच में लगातार सहयोग कर रहे थे। हरिहरन ने दलील दी कि ACB ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली जानकारी के आधार पर FIR दर्ज की थी। उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैन का अपराध से हुई कथित कमाई से कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ था।
— Press Trust of India (@PTI_News) August 25, 2026
STP क्षमता बढ़ाने के फैसले का बचाव
बचाव पक्ष ने STP प्रोजेक्ट की क्षमता बढ़ाने के फैसले का भी बचाव किया। वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा कि STP की क्षमता 15 MGD से बढ़ाकर 25 MGD करने का निर्णय तकनीकी समिति की सिफारिश के आधार पर लिया गया था। उन्होंने बताया कि परियोजना की पीक क्षमता 30 MGD थी।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामला मुख्य रूप से नीतिगत और तकनीकी फैसलों से जुड़ा हुआ है। अदालतों से सामान्यतः ऐसे नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप की अपेक्षा नहीं की जाती। वकील ने कहा कि अदालत उचित शर्तों के माध्यम से आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित कर सकती है और जैन के फरार होने का कोई खतरा नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि ED के मामले में किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। अब अदालत 3 सितंबर को सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी पर अपना फैसला सुनाएगी।