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28 हजार रैंक से AIR 1 तक का सफर! डॉ. मोनीश की वो मास्टर स्ट्रेटजी जिसने उन्हें बना दिया NEET PG टॉपर

September 25, 2026

Time Published: Friday, September 25, 2026, 16:31 [IST]

NEET PG Topper Dr. Monish Kanna Success Story: नीट पीजी जैसी परीक्षा में हजारों मेडिकल स्टूडेंट्स महीनों और सालों तक तैयारी करते हैं, लेकिन हर बार सफलता सिर्फ ज्यादा घंटे पढ़ने से नहीं मिलती। कई बार तैयारी के तरीके में सही समय पर किया गया बदलाव बड़ा फर्क पैदा करता है। ऐसा ही कुछ डॉ. मोनीश के साथ हुआ।

पहले नीट पीजी में करीब 28 हजार रैंक हासिल करने वाले मोनीश ने इस बार अपनी तैयारी का तरीका बदला और 2026 की परीक्षा में देशभर में पहली रैंक हासिल कर ली। उन्होंने 720 में से 641 अंक प्राप्त किए। उनकी तैयारी में हजारों MCQ हल करने के साथ गलतियों का रिकॉर्ड रखना, बार-बार रिवीजन करना और खराब प्रदर्शन के बाद दोबारा ट्रैक पर लौटना शामिल रहा। उन्होंने बर्नआउट के दौर से निकलने के लिए अपनी पढ़ाई का माहौल भी बदला।

Dr Monish Kanna Success Story
Edited with AI

NEET PG 2026 में AIR 1

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड ईएसआईसी हॉस्पिटल कोयम्बटूर से MBBS करने वाले डॉ. मोनीश ने NEET PG 2026 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की है। वह EFIC कोयम्बटूर के 2019 बैच के छात्र रहे हैं। इस बार उन्होंने 720 में से 641 अंक हासिल किए।

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डॉ. मोनीश कन्ना द्वारा Marrow यूट्यूब चैनलों को दिए गए इंटरव्यू में साझा की गई जानकारी के अनुसार, इससे पहले नीट पीजी में उनकी रैंक करीब 28 हजार रही थी। यानी इस बार उन्होंने अपनी तैयारी में बड़ा बदलाव करते हुए सीधे देश में पहला स्थान हासिल किया। इंटरव्यू में मोनीश ने बताया कि उन्होंने अपनी इंटर्नशिप पूरी होने के बाद नीट पीजी की तैयारी शुरू की थी।

10,425 MCQ और 445 लीडरबोर्ड

मोनीश की तैयारी में लगातार MCQ प्रैक्टिस की अहम भूमिका रही। उन्होंने कुल 10,425 MCQ हल किए और 445 लीडरबोर्ड में हिस्सा लिया। इनमें से 85 बार उन्होंने रैंक 1 हासिल की। हालांकि, वह हर क्लास के बाद तुरंत लीडरबोर्ड में टॉप नहीं करते थे। उन्होंने खुद को धीरे सीखने वाला बताया। उनका तरीका था कि पहले दिन की पढ़ाई को दोहराया जाए और फिर अगली सुबह लीडरबोर्ड में सवालों को हल किया जाए। इससे उन्हें पढ़े हुए कॉन्सेप्ट को मजबूत करने और अपनी कमजोरियां पहचानने में मदद मिली।

रोज करीब 100 MCQ का अभ्यास

मोनीश रोजाना करीब 100 MCQ हल करने की कोशिश करते थे। लेकिन उनके लिए सिर्फ सवालों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं थी। उन्होंने एक अलग गलती वाली नोटबुक बनाई थी। जब भी किसी सवाल का जवाब गलत होता, वह यह समझने की कोशिश करते थे कि गलती क्यों हुई। इसके बाद उससे जुड़ी जरूरी जानकारी अपने नोट्स में जोड़ लेते थे। एग्जाम के करीब आने पर वह इसी नोटबुक को दोबारा देखते थे, ताकि पहले की गलतियां फिर न दोहराई जाएं।

शुरुआत में सिर्फ MCQ पर था फोकस

इंटर्नशिप के दौरान मोनीश ने शुरुआत में मुख्य रूप से मल्टीपल चॉइस सवालों पर ध्यान दिया। लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि सिर्फ सवाल हल करना काफी नहीं है। नीट पीजी का मेडिकल सिलेबस काफी बड़ा है। इसलिए उन्होंने अपनी तैयारी को ज्यादा व्यवस्थित किया और पूरे सिलेबस को कवर करने के लिए एक तय तरीका अपनाया।

इसके बाद उनका फोकस सिर्फ सवालों की संख्या बढ़ाने पर नहीं रहा, बल्कि रिवीजन और कमजोर हिस्सों को सुधारने पर भी रहा।

वर्कबुक 4-5 बार दोहराई

मोनीश ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्कबुक को परीक्षा से पहले चार से पांच बार तक रिवाइज किया। हर बार रिवीजन करते हुए वह कमजोर टॉपिक को पहचानते थे। उन्हें बुकमार्क या नोट्स के जरिए अलग रखते और दोबारा उन पर ज्यादा समय देते थे।

वह बेहतर आने वाले विषयों को भी पूरी तरह नहीं छोड़ते थे। उनका प्रयास था कि नीट पीजी के सभी 19 सब्जेक्ट के साथ लगातार संपर्क बना रहे। वह दिन में जो पढ़ते थे, उसे उसी दिन दोहराने की भी कोशिश करते थे।

खराब रिजल्ट के बाद आया बर्नआउट

मोनीश की तैयारी हमेशा एक जैसी नहीं रही। एक समय अचानक खराब रिजल्ट आने के बाद उनका कॉन्फिडेंस प्रभावित हुआ और करीब तीन से चार हफ्तों तक बर्नआउट महसूस हुआ। इस दौरान वह ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने खुद को जबरदस्ती उसी रफ्तार से पढ़ाने के बजाय यह समझने की कोशिश की कि समस्या क्या है। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई का माहौल बदलने के लिए लाइब्रेरी जॉइन की।

नींद, वॉक और मेडिटेशन पर दिया ध्यान

लाइब्रेरी जाने के साथ उन्होंने धीरे-धीरे पढ़ाई दोबारा शुरू की। इस दौरान पूरी नींद, वॉकिंग और जॉगिंग को भी अपनी दिनचर्या में जगह दी। मानसिक रूप से दोबारा मजबूत होने के लिए उन्होंने मेडिटेशन किया। खराब प्रदर्शन के बाद आत्मविश्वास वापस लाने में माता-पिता के सपोर्ट ने भी उनकी मदद की।

यानी उनकी तैयारी सिर्फ किताब और MCQ तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपनी मानसिक स्थिति और पढ़ाई के माहौल पर भी ध्यान दिया।

आखिरी दिनों में बदली पढ़ाई की रफ्तार

परीक्षा से करीब दो हफ्ते पहले मोनीश ने पढ़ाई की रफ्तार बढ़ा दी थी। लेकिन परीक्षा के बिल्कुल करीब आते ही उन्होंने जानबूझकर पढ़ाई का दबाव कम किया। आखिरी दिनों में उनका फोकस छोटे रिवीजन और आराम पर रहा, ताकि परीक्षा के समय दिमाग पर ज्यादा दबाव न हो।

जूनियर मेडिकल स्टूडेंट्स को क्या सलाह?

मोनीश ने जूनियर मेडिकल ग्रेजुएट्स को सलाह दी कि तैयारी के दौरान सही माइंडसेट बनाना जरूरी है। एक भरोसेमंद सोर्स चुनें और बार-बार उसी को रिवाइज करें। इसके साथ लगातार MCQ की प्रैक्टिस करते रहें, लेकिन सिर्फ सवालों की संख्या पर ध्यान न दें। अपनी गलतियों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

उनके मुताबिक तैयारी में खराब दौर आना असामान्य नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि खराब प्रदर्शन के बाद कोई कितनी जल्दी खुद को संभालकर दोबारा तैयारी पर लौटता है।

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