world-news

अकोला न्यू तापड़िया नगर आरओबी मामला: 28 करोड़ की लागत विसंगति पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब| Navbharat Live

July 13, 2026

विज्ञापन

सार

Akola Overbridge Project: अकोला के न्यू तापड़िया नगर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण मामले में मुंबई हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और रेलवे मंत्रालय से 28 करोड़ रुपये की लागत विसंगति पर जवाब मांगा है। 

akola new tapadia nagar rob cost dispute high court

Bombay High Court (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)

विस्तार

New Tapadia Nagar ROB: पिछले आठ वर्षों से अधूरे पड़े न्यू तापड़िया नगर रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण कार्य से परेशान शहरवासियों को अब न्यायपालिका से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 21 जुलाई को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में होगी। न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार और रेलवे मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए परियोजना की लागत में सामने आई 28 करोड़ रुपये की विसंगति पर शपथपत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान सार्वजनिक निर्माण विभाग पीडब्ल्यूडी और रेलवे प्रशासन द्वारा प्रस्तुत लागत संबंधी आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया। पीडब्ल्यूडी के अनुसार, प्रारंभ में 54 करोड़ रु. की इस परियोजना की लागत बढ़कर 107 करोड़ रु. हो गई है, जबकि रेलवे मंत्रालय ने इसकी लागत 79 करोड़ रु. बताई है। दोनों विभागों के दावों में 28 करोड़ रु. का अंतर मिलने पर न्यायालय ने दोनों से विस्तृत जवाब तलब किया है।

अकोला आरओबी मामला पहुंचा हाईकोर्ट

याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता एड. नरेंद्र बेलसरे की ओर से एड. उज्ज्वल देशपांडे ने न्यायालय में पक्ष रखा। याचिका में बताया गया कि पिछले एक वर्ष से आरओबी क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक होने के कारण स्कूली विद्यार्थियों, मरीजों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को प्रतिदिन 7 से 8 कि.मी. अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सम्बंधित ख़बरें

ये भी पढ़े: मानसून में समंदर न उगल दे कचरा! BJP विधायक अमित साटम की BMC से बड़ी मांग, तटों को बचाने का आया धांसू प्लान

जनहित को देखते हुए अनामत राशि से मिली राहतवैयक्तिक लाभ के उद्देश्य से दायर याचिकाओं पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट ने प्रारंभ में याचिकाकर्ता को ढाई लाख रुपये की अनामत राशि जमा करने का निर्देश दिया था।

107 करोड़ और 79 करोड़ की लागत पर उठे सवाल

हालांकि, एड. नरेंद्र बेलसरे ने यह मामला पूरी तरह जनहित और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा होने का तर्क रखा, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने उन्हें अनामत राशि जमा करने से विशेष छूट प्रदान कर दी। अब 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई में महाराष्ट्र सरकार और रेलवे प्रशासन क्या जवाब देते हैं तथा आरओबी निर्माण कार्य को लेकर क्या दिशा तय होती है, इस पर पूरे अकोला शहर की नजरें टिकी हुई हैं।

Follow Navbharatlive whatsapp