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26 जुलाई का रवि प्रदोष व्रत क्यों है खास? जानें पूजा का शुभ समय, महत्व और शिव कृपा पाने की आसान विधि - Haribhoomi

July 22, 2026

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर 26 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।

Ravi Pradosh Vrat 2026

Ravi Pradosh Vrat 2026

  • Published: 22 Jul 2026, 09:36 AM IST
  • Last Updated: 22 Jul 2026, 09:36 AM IST

Ravi Pradosh Vrat 2026:  भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जुलाई महीने का दूसरा प्रदोष व्रत रविवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है।

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। इस बार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला रवि प्रदोष व्रत 26 जुलाई 2026, रविवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में शिव पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

रवि प्रदोष व्रत 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई को दोपहर 1:57 बजे शुरू होगी और 27 जुलाई को शाम 4:14 बजे समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष पूजा सूर्यास्त के समय की जाती है, इसलिए व्रत और पूजा 26 जुलाई को ही की जाएगी।

प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पूजा का शुभ समय शाम 7:16 बजे से रात 9:21 बजे तक रहेगा। यह अवधि लगभग 2 घंटे 5 मिनट की होगी। धार्मिक मान्यता है कि सूर्यास्त के आसपास का समय भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

रवि प्रदोष व्रत का महत्व
मान्यताओं के अनुसार रवि प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन पारिवारिक सुख, मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में सकारात्मकता की कामना से व्रत रखते हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं में भी रविवार को आने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन की गई शिव आराधना व्यक्ति के आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि का माध्यम बन सकती है।

रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान और घर की साफ-सफाई करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें।
  • व्रत का संकल्प लेकर धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।
  • शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
  • शिव चालीसा, शिव स्तुति या मंत्रों का पाठ करें।
  • प्रदोष व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
  • भगवान को भोग अर्पित करें।
  • अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।