पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. सोमवार को ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में दूसरी बार धमाकों की खबर सामने आई. ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बंदर अब्बास और केशम पोर्ट के आसपास फिर विस्फोट हुए, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं.
हालांकि, ताजा धमाकों में हुए नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. घटनास्थल पर स्थिति का आकलन किया जा रहा है.
कई रणनीतिक ठिकानों को बनाया गया निशाना
ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के अनुसार, सोमवार सुबह भी कई रणनीतिक तटीय इलाकों को निशाना बनाया गया था. रिपोर्ट में दावा किया गया कि मशहर, जस्क, सिरिक, बंदर अब्बास और केशम पोर्ट जैसे अहम क्षेत्रों पर मिसाइल हमले हुए.
इन इलाकों का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि ये ईरान के समुद्री व्यापार और रक्षा गतिविधियों के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं. ऐसे में लगातार हो रहे हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
ईरान ने जवाबी कार्रवाई का किया दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है.
आईआरजीसी के अनुसार, जॉर्डन, ओमान, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए. संगठन का दावा है कि इन हमलों में ईंधन भंडारण केंद्र, गोला-बारूद के बंकर, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
तीन चरणों में कार्रवाई का दावा
आईआरजीसी ने अलग-अलग बयानों में अपनी कार्रवाई का विवरण भी साझा किया है. संगठन के अनुसार, पहले चरण में जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया, जिससे ईंधन भंडारण टैंक और मिसाइल डिपो प्रभावित हुए.
दूसरे चरण में बहरीन के शेख ईसा स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हेलीकॉप्टर रखरखाव केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान हैंगर और ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाने का दावा किया गया.
हालांकि, संबंधित देशों या अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
आईआरजीसी का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी तटीय ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. यहां बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है.
दुनिया की नजर हालात पर
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है. यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है, तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है, ताकि क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की संभावना को टाला जा सके.
स्थिति पर बनी हुई है नजर
फिलहाल बंदर अब्बास और केशम पोर्ट के पास हुए ताजा धमाकों की विस्तृत जानकारी का इंतजार है. दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमलों के आरोप लगा रहे हैं, जबकि विभिन्न दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है.
ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयास यह तय करेंगे कि तनाव कम होगा या पश्चिम एशिया एक और बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा