मोबिस इंडिया फाउंडेशन ने भोपाल में शुरू की मध्य प्रदेश एक्सेसिबिलिटी पहल, 23 व्हीलचेयर यूजर्स को मिला कस्टमाइज्ड मोबिलिटी डिवाइस।
मोबिस इंडिया फाउंडेशन ने 23 व्हीलचेयर यूजर्स को बांटे कस्टमाइज्ड मोबिलिटी डिवाइस।
- Published: 11 Aug 2026, 05:29 PM IST
- Last Updated: 11 Aug 2026, 05:29 PM IST
Mobis India Foundation Bhopal: भारत के एक सुलभ, समावेशी और समान समाज बनाने के साझा विजन को आगे बढ़ाते हुए हुंडई मोबिस इंडिया की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) शाखा "मोबिस इंडिया फाउंडेशन" ने 11 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश में अपनी एक्सेसिबिलिटी पहल की शुरुआत की। फाउंडेशन के प्रमुख कार्यक्रम "एक्सेसिबिलिटी एंड फ्रीडम - व्हीलचेयर यूजर्स का मोबिलिटी असिस्टिव डिवाइस द्वारा सशक्तीकरण" के तहत भोपाल में 23 व्हीलचेयर यूजर्स को उनकी जरूरत के अनुसार तैयार किए गए मोबिलिटी असिस्टिव डिवाइस वितरित किए गए।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के केंद्र में हुआ आयोजन
यह वितरण कार्यक्रम भोपाल के कम्पोजिट रीजनल सेंटर (CRC) में आयोजित किया गया। यह केंद्र भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत आने वाले "दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग" (DEPwD) का एक प्रमुख संस्थान है। यह कार्यक्रम दिव्यांगजनों के लिए सुलभ और स्वतंत्र जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में सरकारी संस्थानों, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी और सहायक तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाले इनोवेटर्स की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मध्य प्रदेश के आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया शामिल हुए। उन्होंने लाभार्थियों को उनकी जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए मोबिलिटी डिवाइस वितरित किए और इस दौरान उनसे बातचीत भी की।
13 अगस्त को इंदौर में होगा अगला वितरण कार्यक्रम
भोपाल का यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश में मोबिस इंडिया फाउंडेशन की "एक्सेसिबिलिटी आउटरीच" की शुरुआत है। इस पहल के जरिए राज्यभर में व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वाले कुल 60 लोगों को उनकी जरूरतों के हिसाब से मोबिलिटी समाधान मुहैया कराए जाएंगे। भोपाल के इस कार्यक्रम के बाद 13 अगस्त 2026 को इंदौर में एक विशेष वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें 37 और लोगों को कस्टमाइज्ड मोबिलिटी डिवाइस दिए जाएंगे, जिससे राज्यभर में फाउंडेशन का दायरा और बढ़ेगा।

आवाजाही में स्वतंत्रता है सबसे बड़ी चुनौती
चलने-फिरने में अक्षमता और रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे लोगों के लिए स्वतंत्र रूप से घूमना-फिरना एक बड़ी चुनौती साबित होता है। अक्सर इसी वजह से उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक सेवाओं, खेल और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्वतंत्रता और समान अवसरों के लिए आवाजाही की क्षमता को आधार मानते हुए इस पहल का मकसद इन बाधाओं को दूर करना है, ताकि लोग आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ अपने सपने पूरे कर सकें।
6.3 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय पहल का हिस्सा है यह कार्यक्रम
मध्य प्रदेश का यह कार्यक्रम मोबिस इंडिया फाउंडेशन की 6.3 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय "एक्सेसिबिलिटी पहल" का हिस्सा है। यह पहल आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 600 व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वालों को पर्सनलाइज्ड नियोफ्लाई (NeoFly) व्हीलचेयर और नियोबोल्ट (NeoBolt) मोटर-पावर्ड अटैचमेंट उपलब्ध कराकर मदद कर रही है। यह सिर्फ मोबिलिटी डिवाइस बांटने का कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि इसे एक दीर्घकालिक निवेश के तौर पर तैयार किया गया है, जिसका मकसद दिव्यांग व्यक्तियों को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, स्वास्थ्य सेवा, खेल और सामुदायिक जीवन में अधिक सक्रिय भागीदारी के लिए सक्षम बनाना है।
IIT मद्रास की टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ हुई पार्टनरशिप
यह कार्यक्रम नियोमोशन के साथ साझेदारी में चलाया जा रहा है, जो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास में इनक्यूबेटेड एक असिस्टिव टेक्नोलॉजी कंपनी है और इनोवेटिव व पर्सनलाइज्ड मोबिलिटी समाधान डिजाइन करने के लिए समर्पित है। हर लाभार्थी को मोबिलिटी डिवाइस मिलने से पहले उसकी पूरी क्लिनिकल जांच और शरीर का विस्तृत माप लिया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर व्हीलचेयर को बेहतरीन पोस्चर, आराम, सुरक्षा और लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए अलग-अलग तरीके से कस्टमाइज किया गया है।
हर लाभार्थी को एक कस्टमाइज्ड नियोफ्लाई व्हीलचेयर दी जाती है, जिसे अलग-अलग क्लिनिकल और फंक्शनल जरूरतों के अनुसार कई पर्सनलाइजेशन विकल्पों के साथ तैयार किया गया है। जब इसे नियोबोल्ट के साथ जोड़ा जाता है, जो IIT मद्रास में विकसित एक पेटेंटेड मोटर-पावर्ड अटैचमेंट है, तो व्हीलचेयर कुछ ही सेकंड में सड़क पर चलने लायक पर्सनल मोबिलिटी वाहन में तब्दील हो जाती है, जिससे उपयोगकर्ता सुरक्षित और अकेले लंबी दूरी तय कर सकते हैं, साथ ही शारीरिक मेहनत भी काफी कम हो जाती है।
हर व्यक्ति के लिए अलग से तैयार होता है डिवाइस
आमतौर पर होने वाले व्हीलचेयर वितरण कार्यक्रमों से अलग, इस पहल में हर व्यक्ति की खास शारीरिक जरूरतों के अनुसार मोबिलिटी डिवाइस डिजाइन किया जाता है, न कि "एक ही साइज सबके लिए" वाला मॉडल अपनाया जाता है। इस तरीके से न सिर्फ आराम बढ़ता है, बल्कि गलत तरीके से बैठने से होने वाली अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी कम होता है, जिससे लाभार्थी अधिक स्वतंत्र, उत्पादक और खुशहाल जीवन जी पाते हैं।
फाउंडेशन और आयुक्त दिव्यांगजन ने साझा किए विचार
इस पहल पर टिप्पणी करते हुए मोबिस इंडिया फाउंडेशन के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी प्रमुख नरसिम्हन जी. ने कहा, "सुलभता समावेश का एक सबसे मजबूत प्रेरक है क्योंकि यह उन जगहों पर अवसर पैदा करती है जहां पहले बाधाएं मौजूद थीं। स्वतंत्र गतिशीलता अक्सर शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, स्वास्थ्य सेवा और समाज में सक्रिय भागीदारी की दिशा में पहला कदम होता है। मोबिस इंडिया फाउंडेशन में हम मानते हैं कि सार्थक सामाजिक प्रभाव तब शुरू होता है जब नवाचार को लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इस पहल के माध्यम से हम केवल सहायक तकनीक प्रदान नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम आकांक्षाओं को साकार करने, आत्मविश्वास वापस लाने और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए स्वतंत्र और आत्मनिर्भर जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।"
मध्य प्रदेश के आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया ने कहा, "सबको साथ लेकर चलने वाला विकास तब होता है जब हर नागरिक को समाज में बराबर हिस्सा लेने का अधिकार मिलता है। सुगम्य आवाजाही यह सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है कि दिव्यांग लोग सम्मान और आत्मविश्वास के साथ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक स्थानों और अवसरों तक पहुंच सकें। यह देखना उत्साहजनक है कि कम्पोजिट रीजनल सेंटर, भोपाल जैसे संस्थान, मोबिस इंडिया फाउंडेशन जैसे कॉर्पोरेट लीडर और टेक्नोलॉजी इनोवेटर मिलकर ऐसे पर्सनलाइज्ड मोबिलिटी समाधान तैयार कर रहे हैं जिनमें लोगों की जिंदगी बदलने की क्षमता है। ऐसी साझा पहल एक अधिक सुलभ और समावेशी मध्य प्रदेश बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं।"
इंदौर में बढ़ेगा फाउंडेशन का दायरा
भोपाल के कम्पोजिट रीजनल सेंटर में सफल शुरुआत के बाद यह पहल 13 अगस्त 2026 को इंदौर में आगे बढ़ेगी, जहां 37 और व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वालों को उनकी जरूरतों के अनुसार मोबिलिटी डिवाइस दिए जाएंगे। इससे मध्य प्रदेश में मोबिस इंडिया फाउंडेशन के कुल लाभार्थियों की संख्या 60 तक पहुंच जाएगी। जैसे-जैसे यह राष्ट्रीय कार्यक्रम कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आगे बढ़ रहा है, फाउंडेशन समावेशी विकास के लिए सुगम्यता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध बना हुआ है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांगजन न केवल स्वतंत्र रूप से आ-जा सकें, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, खेल और सामुदायिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकें।