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शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का अचानक यू-टर्न, सितंबर में निकाले 21,000 करोड़ रुपए

September 20, 2026

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारतीय शेयर बाजार में लगातार दो महीने तक लिवाली करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने एक बार फिर आक्रामक बिकवाली शुरू कर दी है। ग्लोबल स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल में उछाल और डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर फिसलते रुपए के दबाव में विदेशी निवेशकों ने सितंबर महीने में अब तक भारतीय इक्विटी बाजार से 20,974 करोड़ रुपये की भारी-भरकम निकासी कर ली है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले विदेशी निवेशकों ने जुलाई में 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,630 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था, लेकिन सितंबर में अचानक सेंटीमेंट बदल गया।

2026 में अब तक ₹2.45 लाख करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली
सितंबर में हुई ताजा बिकवाली के साथ ही साल 2026 में विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से कुल पूंजी निकासी का आंकड़ा 2.45 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा साल 2025 में पूरे वर्ष के दौरान हुई कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी से भी काफी अधिक है। हालांकि, विदेशी निवेशक आईपीओ (प्राइमरी मार्केट) के जरिए चुनिंदा निवेश जारी रखे हुए हैं, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में जोरदार बिकवाली हावी है। विदेशी निवेशकों ने सिर्फ इक्विटी ही नहीं, बल्कि भारतीय डेट (बॉन्ड) मार्केट से भी जमकर पैसा निकाला है। आंकड़ों के अनुसार, फुल एक्सेस रूट (FAR) के जरिए 10,296 करोड़ रुपये, वॉलेंटरी रिटेंशन रूट (VRR) से 1,817 करोड़ रुपये और सामान्य मार्ग से 1,068 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई है।

विदेशी निवेशकों के बाजार छोड़ने की 3 बड़ी वजहें

1. अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और हाई बॉन्ड यील्ड: चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें 3.75-4 प्रतिशत के स्तर पर टिकी हुई हैं और बॉन्ड यील्ड में तेजी जारी है। इससे अमेरिका और भारत की यील्ड का अंतर कम हो गया है, जिससे विदेशी फंड्स के लिए भारतीय बाजारों का जोखिम-इनाम अनुपात कमजोर पड़ा है।

2. $100 के पार कच्चा तेल: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में महंगे तेल से देश का आयात बिल, चालू खाता घाटा (CAD) और महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा पैदा हो गया है।

3. कमजोर होता रुपया: ट्रैक (Traq) के को-फाउंडर एवं सीईओ वेदांत गुप्ते का कहना है कि डॉलर के मजबूत होने और कच्चे तेल के झटके से रुपया रिकॉर्ड गिरावट की चपेट में है। पिछले सप्ताह रुपए में 1.1 प्रतिशत की तीव्र गिरावट देखी गई, जो बीते चार महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.92-95.96 के स्तर पर फिसल गया और इंट्रा-डे में 96 प्रति डॉलर का आंकड़ा भी पार कर गया।

रुपए में जारी इस कमजोरी और उभरते बाजारों से पूंजी के सुरक्षित निवेश की ओर लौटने के चलते एफपीआई सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे घरेलू शेयर बाजारों पर बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है।

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