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चिप मैन्युफैक्चरिंग में दिखेगा भारत का दम, 2035 तक 33.54 लाख करोड़ पर पहुंचेगे इंडिया का चिप मार्केट

July 13, 2026

चिप मैन्युफैक्चरिंग में दिखेगा भारत का दम, 2035 तक 33.54 लाख करोड़ पर पहुंचेगे इंडिया का चिप मार्केट

सेमीकंडक्टरImage Credit source: Narumon Bowonkitwanchai/Moment/Getty Images

फैब इकोनॉमिक्स ने अनुमान लगाया है कि 2026 में भारत में सेमीकंडक्टर डिवाइस और कंपोनेंट की खपत 54 बिलियन डॉलर (लगभग 5.17 लाख करोड़) होगी और 2030 तक इसके 130 बिलियन डॉलर (लगभग 12.46 लाख करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है, बशर्ते सरकार की तरफ से लगातार इंसेंटिव और सब्सिडी मिलती रहे. ये भी कहा गया है कि 2035 तक, भारत इस पार्ले (parlay) के तहत 350 बिलियन डॉलर (लगभग 33.54 लाख करोड़) के सेमीकंडक्टर डिवाइस और कंपोनेंट की खपत कर सकता है. ये भी कहा जा रहा है कि भारत घरेलू खपत और भारत से एक्सपोर्ट सप्लाई से होने वाले रेवेन्यू से अपने सेमीकंडक्टर इंपोर्ट बिल के 20 फीसदी को पार करते हुए घरेलू फैब्रिकेशन और पैकेजिंग की क्षमता हासिल कर सकता है.

भारत में पुराने फैब के लिए लागत के स्ट्रक्चर के अनुमान से पता चला है कि भारत की मौजूदा स्थिति, जिसमें फैब प्रोजेक्ट लागत का 85 फीसदी से ज्यादा और वेफर बनाने की लागत का लगभग 50 फीसदी आयात पर निर्भर है. 2030 तक धीरे-धीरे कम होकर फ़ैब प्रोजेक्ट लागत का 68 फीसदी से ज्यादा और वेफर बनाने की लागत का लगभग 30 फीसदी आयात पर निर्भर हो सकती है और 2035 तक दुनिया के सेमीकंडक्टर क्लस्टर के मेट्रिक्स से मेल खा सकती है, जिसमें आयात पर निर्भरता घटकर फ़ैब प्रोजेक्ट लागत का 55 फीसगी और वेफ़र बनाने की लागत का लगभग 18 फीसदी रह जाएगी.

2030 तक तीन इंसेंटिव पैकेज की है जरूरत

हालांकि, चेतावनी भी दी है कि आयात पर निर्भरता में इतनी तीव्र गिरावट के लिए सब्सिडी पैकेजों की निरंतरता (कंटीन्यूटी) और एग्जीक्यूशन और प्राथमिकता की निरंतर गति की आवश्यकता है . इसके लिए 2030 तक तीन प्रोत्साहन (इंसेंटिव) पैकेज ISM 1.0, 2.0, 3.0 की आवश्यकता है, जो केंद्र और राज्यों को मिलाकर कुल 40 बिलियन डॉलर (लगभग 3.83 लाख करोड़) की सब्सिडी देंगे और दो अतिरिक्त पैकेज ISM 4.0, 5.0, जिनमें से प्रत्येक में 20 बिलियन डॉलर (लगभग 1.92 लाख करोड़) की वृद्धिशील सब्सिडी होगी.

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तरुण चड्ढा

तरुण चड्ढा

स्कूल में पढ़ते वक्त ही गैजेट्स से लगाव होने लगा था और फिर 11वीं कक्षा में पहुंचने के बाद ही सोच लिया था कि स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद किस दिशा में आगे बढ़ना है. आईपी यूनिवर्सिटी में 5 साल जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद मीडिया में करियर की शुरुआत हुई. गैजेट्स से लगाव होने की वजह से मीडिया में एंट्री के बाद से टेक जर्नलिस्ट की भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया में सफर का आगाज़ नवोदय टाइम्स से हुआ, इसके बाद इंडिया न्यूज, जनसत्ता, एनबीटी जैसे बड़ी कंपनियों में काम करने का सुनहरा अवसर मिला और साथ ही इंडस्ट्री से जुड़ी कईं दिग्गजों से बहुत कुछ सीखने को मिला. हर दिन उठने के बाद यही सोचता हूं कि आज कुछ नया सीखना है और यही जुनून लेकर आगे बढ़ रहा हूं. पिछले 8 सालों से इंडस्ट्री से जुड़ा हूं और अभी टीवी9 में टेक-ऑटो सेक्शन में काम कर रहा हूं.

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