भारत-ब्रिटेन एफटीए से 2030 तक 115 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है द्विपक्षीय व्यापार, 7-10 लाख नई नौकरियों के सृजन होने की उम्मीद: एसोचैम
भारत-ब्रिटेन एफटीए से 2030 तक 115 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है द्विपक्षीय व्यापार, 7-10 लाख नई नौकरियों के सृजन होने की उम्मीद: एसोचैम
IANS
25 Jul 2026
16:05 IST
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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। भारत और ब्रिटेन के बीच लागू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 58 अरब डॉलर (2025-26) से बढ़कर 115 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। साथ ही, इससे 7 से 10 लाख नए रोजगार सृजन होने की संभावनाएं हैं। यह जानकारी एसोचैम की एक नई स्टडी में सामने आई है।
एसोचैम ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रैटेजी सेंटर की स्टडी के अनुसार, 15 जुलाई 2026 से लागू भारत-ब्रिटेन एफटीए के जरिए बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे कारोबार का दायरा बढ़ेगा और देश की युवा आबादी के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
स्टडी में कहा गया है कि टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोटिव जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों को नए अवसर और व्यापक बाजार मिलने से रोजगार सृजन और निर्यात दोनों को बड़ा लाभ होगा।
हालांकि, स्टडी में यह भी कहा गया है कि इस बड़ी संभावना का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता लगातार मजबूत बनाए रखनी होगी।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, भारतीय कंपनियों को उत्पाद गुणवत्ता, सर्टिफिकेशन आवश्यकताओं, रूल्स ऑफ ओरिजिन के अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय सस्टेनेबिलिटी मानकों को पूरा करना होगा। कारोबार सुगमता से जुड़े सुधार तथा इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन में लगातार निवेश इन मानकों को हासिल करने की कुंजी होंगे।
स्टडी के मुताबिक, इंजीनियरिंग गुड्स क्षेत्र को इस समझौते से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे एमएसएमई के विकास को गति मिलेगी और अंततः रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इसके अलावा, आसान कस्टम्स प्रक्रियाएं और डिजिटल ट्रेड से जुड़े प्रावधान अनुपालन को सरल बनाएंगे, कारोबार में लगने वाला समय कम करेंगे और व्यापारिक माहौल को अधिक चुस्त और प्रभावी बनाएंगे।
स्टडी में कहा गया है कि भारत-ब्रिटेन सीईटीए दो ऐसी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है, जो एक-दूसरे की पूरक हैं।
जहां भारत के पास बड़ा बाजार, युवा कार्यबल, मजबूत एमएसएमई आधार और श्रम-प्रधान उद्योगों की ताकत है, वहीं ब्रिटेन उन्नत तकनीक और उच्च मूल्य वाली सेवाओं में विशेषज्ञता प्रदान करता है।
एसोचैम के अनुसार, दोनों देशों की ये पूरक क्षमताएं दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग, व्यापार वृद्धि, संयुक्त नवाचार और सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने में मदद करेंगी, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक माहौल लगातार अनिश्चित बना हुआ है।
स्टडी में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगातार जटिल होते परिदृश्य के बीच भारत-ब्रिटेन एफटीए दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
–आईएएनएस
डीबीपी
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