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सायोनी घोष समेत 20 बागी सांसदों की पार्टी पर EC हुआ मौन? 84 दिन बाद भी नहीं कोई जवाब

September 10, 2026

Sep 10, 2026 10:43 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

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ममता बनर्जी गुट वाले तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया है कि 84 दिन से ज्यादा बीत गए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने NCPI से जुड़े मुद्दे पर RTI में मांगी गई जानकारी पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।

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TMC के 20 बागी सांसदों की पार्टी NCPI पर टीएमसी ने EC से RTI के जरिए जवाब मांगा है।

काबा-मदीना गाने वाली सांसद सायोनी घोष और उनके साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के गुट और उनकी पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) पर चुनाव आयोग द्वारा नरम रुख अपनाने का आरोप लगा है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता साकेत गोखले ने गुरुवार (10 सितंबर) को NCPI की साख पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर चुनाव आयोग ने इस पार्टी के बारे में जानकारी देने के अनुरोध वाले उनके आरटीआई आवेदन का 84 दिन से कोई जवाब क्यों नहीं दिया?

बता दें कि NCPI एक पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। पश्चिम बंगाल चुनावों में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी TMC के 20 सांसद टूटकर इसी NCPI में शामिल हो गए हैं। राज्यसभा के पूर्व सदस्य गोखले ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि NCPI का 2023 में पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग के पास पंजीकरण कराया गया था और पार्टी ने सिर्फ एक बार ही त्रिपुरा में चुनाव लड़ा है, लेकिन तृणमूल के 20 सांसदों ने इसमें शामिल होने का दावा किया है।

16 जून को ही RTI से मांगा जवाब

तृणमूल नेता ने बताया कि उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत निर्वाचन आयोग के समक्ष 16 जून को एक आवेदन दायर किया था, जिसमें NCPI के पंजीकरण, संविधान, पदाधिकारियों, चंदे, ऑडिट किए गए खातों, चुनाव खर्च और चुनाव में भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड के साथ-साथ यह जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था कि पार्टी के खिलाफ कोई जांच या निरीक्षण तो नहीं किया गया।

NCPI पर मांगी गई है विस्तृत जानकारी

गोखले के मुताबिक, आरटीआई आवेदन में एनसीपीआई के पंजीकरण के बाद से उसकी तरफ से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-29सी के तहत हर वित्त वर्ष के लिए दाखिल चंदा रिपोर्ट की प्रति के साथ-साथ पार्टी को मिले चंदे के रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि आरटीआई आवेदन में इस बात की भी जानकारी मांगी गई है कि क्या पार्टी का पंजीकृत कार्यालय मौजूद है, क्या वह काम कर रहा है और क्या इस बारे में कोई सत्यापन या फील्ड जांच की गई है।

84 दिन से ज्यादा बीत गए, EC मौन

गोखले ने कहा, "84 दिन से ज्यादा बीत गए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।" उन्होंने कहा कि यह मामला हाल में आई एक रिपोर्ट के मद्देनजर अहम हो गया है, जिसमें कुछ पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। गोखले ने पूछा कि क्या चुनाव आयोग ने एनसीपीआई का कोई निरीक्षण किया था। उन्होंने कहा, “NCPI क्या है? इस पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का हकीकत में कोई अस्तित्व है भी या नहीं? इसके पदाधिकारी कौन हैं? पार्टी का संविधान कहां है?”

आयोग ने ठीक से जांच नहीं की

गोखले ने आरोप लगाया कि पार्टी ने पिछले दो वर्षों से चंदे से जुड़ी रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। उन्होंने सवाल उठाया कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद कैसे ऐसे संगठन में शामिल होने का दावा कर सकते हैं, जिसकी साख और कामकाज की निर्वाचन आयोग ने ठीक से जांच नहीं की थी। गोखले ने बताया कि उसी दिन लोकसभा सचिवालय में दायर किए गए दूसरे आरटीआई आवेदन में संबंधित सांसदों के इस दावे से जुड़े रिकॉर्ड मांगे गए कि वे तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं।

लोकसभा अध्यक्ष से भी मांगी गई जानकारी

उन्होंने बताया कि आरटीआई आवेदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे गए प्रतिवेदन, उस पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों की पूरी सूची, इस व्यवस्था पर आपत्ति जताने वाले तृणमूल के पत्र और उसके बाद हुए सभी पत्राचार, फाइल टिप्पणियों और फैसलों की प्रतियां भी मांगी गईं। गोखले के अनुसार, आरटीआई आवेदन में सदन में सदस्यों के बैठने की व्यवस्था, पार्टियों और समूहों की मान्यता, निर्वाचन आयोग के साथ संचार और संविधान के दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत दायर किसी भी याचिका या नोटिस से जुड़े रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।

SC में भी 20 सांसदों से जुड़ी याचिका लंबित

उन्होंने कहा कि लोकसभा सचिवालय ने भी 84 दिन बीत जाने के बावजूद आरटीआई आवेदन का जवाब नहीं दिया है। गोखले ने इस मुद्दे को तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण को लेकर जारी बड़े विवाद से जोड़ा, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट ने भी निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी पर अपना दावा जताया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की पहचान और चुनाव चिह्न को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से अलग नहीं किया जा सकता। गोखले ने कहा, "ममता बनर्जी हमेशा से पार्टी का चेहरा रही हैं। आप इसे उनसे छीन नहीं सकते।" उन्होंने 20 सांसदों को संसद सदस्य के रूप में अयोग्य ठहराए जाने के अनुरोध वाली याचिका पर शीर्ष अदालत में लंबित कार्यवाही का भी जिक्र किया।

EC में TMC के दोनों गुटों की 12 सितंबर को पेशी

गोखले ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने इन सांसदों को नोटिस जारी किए थे, जिनका जवाब देने के लिए इन सदस्यों ने और समय देने का अनुरोध किया था। निर्वाचन आयोग के ममता नीत तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों और ऋतब्रत गुट के सदस्यों को 12 सितंबर (शनिवार) को अलग-अलग बैठक के लिए बुलाए जाने से जुड़े सवाल के जवाब में गोखले ने कहा कि बैठक के लिए पांच सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल जाएगा, जिसमें उनके (गोखले) अलावा राज्यसभा में पार्टी के नेता डेरेक ओ'ब्रायन, लोकसभा में मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी, राज्यसभा में पार्टी की उपनेता सागरिका घोष और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव सिंह शामिल होंगे।

गोखले ने कहा कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी चिंताओं एवं आपत्तियों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस शनिवार की बैठक में शामिल होगी, "क्योंकि यह हमारा कर्तव्य है।" उन्होंने कहा, "यह एक ऐसा प्रतिनिधिमंडल है, जिसे पार्टी अध्यक्ष ने चुना है। यह पांच सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल है और हम शनिवार को निर्वाचन आयोग के साथ बैठक के लिए जाएंगे।"