world-news

बिहार के सभी थानों में 2 अक्टूबर से शुरू होगा बाल सहायता डेस्क, बच्चों को मिलेगा भयमुक्त माहौल - Haribhoomi

September 19, 2026

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बिहार पुलिस ने अनूठी पहल की है। 2 अक्टूबर से राज्य के सभी थानों में बाल सहायता डेस्क का गठन किया जाएगा।

Bihar Police child help desk, Supreme Court order

बिहार के सभी थानों में 2 अक्टूबर से शुरू होगा बाल सहायता डेस्क

  • Published: 19 Sep 2026, 06:19 PM IST
  • Last Updated: 19 Sep 2026, 06:19 PM IST

Bihar news: बिहार के थानों की कार्यशैली में एक सकारात्मक और संवेदनशील बदलाव देखने को मिलने वाला है। पुलिस मुख्यालय की ओर से राज्य के सभी थानों में बाल सहायता डेस्क (Child Help Desk) स्थापित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसका मुख्य उद्देश्य थानों में आने वाले बाल आरोपियों या बाल पीड़ितों को पूरी तरह सुरक्षित, संवेदनशील और भयमुक्त वातावरण प्रदान करना है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती यानी आगामी 2 अक्टूबर से यह व्यवस्था सूबे के सभी थानों में प्रभावी रूप से काम करने लगेगी। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से आगामी 5 अक्टूबर तक हेल्प डेस्क के गठन की अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की है। सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के सख्त निर्देशों के बाद यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में होगा संचालन
पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग (कमजोर वर्ग) से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था का खाका बिहार पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 8 (5) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है। प्रत्येक थाना परिसर में बनने वाला यह बाल सहायता डेस्क थाने के लॉकअप से पूरी तरह से अलग स्थान पर होगा।

बच्चों के मन से पुलिस और थाने के डर को दूर करने के लिए इस डेस्क के आसपास का माहौल पूरी तरह बाल-अनुकूल (चाइल्ड फ्रेंडली) बनाया जाएगा, जिसके तहत दीवारों पर आकर्षक और रंगीन पेंटिंग भी कराई जाएगी। इस डेस्क पर बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी का नाम, उनका पदनाम और मोबाइल नंबर के साथ-साथ संबंधित जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी का नाम और संपर्क नंबर भी स्पष्ट रूप से बोर्ड पर लिखा नजर आएगा। एडीजी (कमजोर वर्ग) केएस अनुपम ने स्पष्ट किया है कि जिलों में डीएसपी (विशेष अपराध) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस डेस्क के कामकाज पर लगातार नजर रखेंगे, जिससे बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

बालिकाओं की सहायता के लिए तैनात होंगी महिला पुलिसकर्मी
बाल सहायता डेस्क की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी थानों में विशेष निर्देश दिए गए हैं। थानों में बालिकाओं से जुड़ी समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए योग्य महिला पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने यह भी ताकीद की है कि डेस्क पर प्रदर्शित किए जाने वाले मोबाइल नंबर हर वक्त चालू और सक्रिय रहने चाहिए।

बच्चों या उनके अभिभावकों की ओर से थाने में जो भी शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी, उन पर बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन (डिसपोजल) करने और उनका समुचित रिकॉर्ड (अभिलेख संधारण) तैयार रखने के भी सख्त निर्देश दिए गए हैं।

क्यों पड़ी इस विशेष व्यवस्था की जरूरत?
कानूनी जानकारों और बाल अधिकारों के जानकारों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस तंत्र को अत्यधिक संवेदनशील बनाने के निर्देश दिए हैं। नियमों के मुताबिक, कानून की गिरफ्त में आए या पीड़ित बच्चों की पहचान किसी भी स्थिति में सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।

अक्सर थानों का माहौल देखकर बच्चे डर जाते हैं और उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक होने की आशंका बनी रहती है। जब कोई पीड़ित बच्चा या उसके परिजन थाने पहुंचते हैं, तो उनकी प्राइवेसी (निजता) सुरक्षित रहे और उन्हें एक दोस्ताना माहौल मिले, इसी को ध्यान में रखते हुए यह अलग डेस्क बनाया जा रहा है ताकि बच्चों से जुड़ी हर शिकायत पर त्वरित और न्यायसंगत कार्रवाई हो सके।