बेगूसराय जिले में एक बार फिर से गंगा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन अभी भी बेगूसराय के 189 गांव के करीब 4 लाख लोग बाढ़ से पूरी तरह से प्रभावित हैं। सड़क ही नहीं, बल्कि घरों में भी तीन से चार फीट तक पानी है, उसके कारण
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जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर लगातार संचालित किए जा रहे हैं। इस संबंध में जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी राजू कुमार ने प्रेस वार्ता कर जिले में बाढ़ की वर्तमान स्थिति तथा प्रशासन द्वारा संचालित राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।

जानकारी लेते प्रभारी मंत्री रामकृपाल यादव
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 41.76 मीटर से 43.39 मीटर ऊपर दर्ज
राजू कुमार ने बताया कि वर्तमान में नदी का जलस्तर खतरे के निशान 41.76 मीटर से ऊपर 43.39 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि जिले में अब तक का सर्वोच्च बाढ़ स्तर 43.52 मीटर रहा है। जिले के सभी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा प्रशासन द्वारा तटबंधों की 24 घंटे लगातार निगरानी की जा रही है।
8 प्रखंडों की 39 पंचायतें (37 ग्राम पंचायत एवं 2 नगर) शामिल हैं तथा कुल 189 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 95245 परिवारों के 380980 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं आवागमन के लिए कुल 262 नावों का परिचालन किया जा रहा है, जिनमें 23 सरकारी एवं 239 निजी नावें शामिल हैं।

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कम्यूनिटी किचन की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन के पास कुल 264 नाव मौजूद
जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी ने बताया कि प्रशासन के पास कुल 264 नावें उपलब्ध हैं, जिनमें 260 जिला प्रशासन तथा 4 IOCL (बरौनी रिफाइनरी) की नावें हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित रेस्क्यू एवं बचाव कार्य के लिए बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी एवं शाम्हो में SDRF तथा बलिया प्रखंड में NDRF की टीमों को तैनात किया गया है।
बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 174 सामुदायिक रसोई केंद्रों वर्तमान में सक्रिय हैं। इन सामुदायिक रसोई के माध्यम से अब तक 230057 लोगों को भोजन कराया जा चुका है। अब तक 15355 पॉलिथीन शीट्स का वितरण किया गया है। राहत एवं आश्रय की आवश्यकता को देखते हुए 80 राहत शिविर केंद्र भी चिन्हित किए गए हैं।

हेल्थ कैंप लगाकर बाढ़ प्रभावितों को दवाइयां दी जा रही है, उनका इलाज किया जा रहा है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 57 मेडिकल कैंप, एक बोट एम्बुलेंस कार्यरत
स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाए रखने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 57 मेडिकल कैंप तथा एक बोट एम्बुलेंस कार्यरत हैं। अब तक 14545 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता एवं सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल द्वारा 45 अस्थायी शौचालय संचालित किए जा रहे हैं तथा 31 नए चापाकल लगाए गए हैं।
पशुपालकों को भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। 30 पशु चिकित्सा शिविर कार्यरत हैं, जिनमें अब तक 1,श999 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। पशुओं के लिए अब तक 911.85 क्विंटल पशुचारा वितरित किया गया है। शबाढ़ से 27034 हेक्टेयर फसल रकवा प्रभावित हुआ है, जिसमें 33 प्रतिशत से अधिक क्षति वाले 19504 हेक्टेयर रकवे का आकलन किया गया है।

पशु चिकित्सा कैंप भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगाया गया है, जहां पशुओं का इलाज कर उन्हें दवाइयां दी जा रही है।
जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रख रही
डीपीआरओ नेहा कुमारी ने बताया कि जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। राहत, बचाव, स्वास्थ्य, भोजन, पेयजल, स्वच्छता एवं पशु चिकित्सा सहित आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी संबंधित विभागों को सक्रिय रखा गया है। सभी प्रभावित लोगों तक हर संभव सहायता एवं आवश्यक सुविधाएं समय से पहुंचाने के लिए तत्पर एवं मुस्तैद है।
इधर, जिले के प्रभारी मंत्री रामकृपाल यादव ने मल्हीपुर दक्षिण बिंदटोली, निपानिया मधुरापुर एवं बरौनी-2 के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर बाढ़ की वर्तमान स्थिति एवं प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही राहत सुविधाओं का जायजा लिया। प्रभारी मंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलजमाव आवागमन की स्थिति का निरीक्षण किया।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही राहत एवं बचाव सुविधाओं की जानकारी ली। प्रभावित लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्रेसवार्ता में आपदा पदाधिकारी एवं डीपीआरओ
प्रभावित परिवारों ने अपनी समस्याओं से प्रभारी मंत्री को अवगत कराया
प्रभारी मंत्री रामकृपाल यादव ने विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में संचालित कम्युनिटी किचन का भी निरीक्षण किया और वहां प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे पका हुआ भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे शौचालय, शुद्ध पेयजल, पन्नी सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया।
प्रभावित परिवारों ने अपनी समस्याओं से प्रभारी मंत्री को अवगत कराया। मंत्री ने उनकी समस्याओं को सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता एवं राहत सामग्री समय पर पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों को पूरी तत्परता के साथ करने तथा लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने देने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता, शौचालय, पन्नी सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता की नियमित रूप से निगरानी की जाए। साथ ही प्रभावित परिवारों से प्राप्त समस्याओं का स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार संचालित किए जा रहे हैं। प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखते हुए सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अधिकारी संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाएं।