Sep 07, 2026 09:51 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल की बदहाल स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने छात्रों को वहां से हटाकर हॉस्टल में भेजने का फैसला किया। स्कूल में बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। 92 छात्रों के लिए महज 5 शौचालय थे।

कर्नाटक के आवासीय स्कूल की वायरल तस्वीरें।
कर्नाटक के हासन जिले में शांतिग्राम स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर आवासीय स्कूल से सामने आई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। ये सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। स्कूल में पढ़ने वाले कुल 172 छात्रों को अब दो नजदीकी हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया है। इनमें कक्षा 6 से 10 तक के 92 छात्र और 80 छात्राएं शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये बच्चे पिछले करीब 5 वर्षों से तबेले जैसे परिसर में रहने को मजबूर थे। इसी जगह पर वे पढ़ाई करने, खाना खाने और सोने का काम करते थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल की बदहाल स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने छात्रों को वहां से हटाकर हॉस्टल में भेजने का फैसला किया। स्कूल में बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। 92 छात्रों के लिए महज 5 शौचालय थे, जबकि छात्राओं को भी जरूरी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा था। परिसर में रोशनी और हवा की व्यवस्था अच्छी नहीं थी। कक्षा 6 के छात्रों को कथित तौर पर फर्श पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। बच्चों के रहने, पढ़ने और भोजन करने के लिए एक ही परिसर का इस्तेमाल किया जा रहा था।
राज्य सरकार हरकत में कैसे आई
आवासीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मुहैया कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है, लेकिन यहां बरसों तक पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाने का आरोप सामने आया है। यह स्कूल कर्नाटक के समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित होता है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद राज्य सरकार भी हरकत में आई है। प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने स्कूल की स्थिति को लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। सरकार की ओर से मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, स्कूल के लिए नया भवन बनाने का काम फिलहाल जारी है। समाज कल्याण विभाग का कहना है कि छात्रों के लिए तत्काल कोई दूसरा भवन उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण उन्हें अस्थायी तौर पर पशुशाला वाले परिसर में रखा गया था। हालांकि, पांच वर्षों तक बच्चों को ऐसे स्थान पर रखने की वजह को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल 172 छात्रों को दो अलग-अलग नजदीकी छात्रावासों में भेज दिया गया है, जिससे उन्हें पहले की तुलना में बेहतर रहने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।