टीआई-प्रधान आरक्षक की लापरवाही से बन गए 17 फर्जी पासपोर्ट: डबरा पुलिस की बड़ी लापरवाही, STF डीआरजी ने लिखा एसपी को पत्र - Gwalior News
September 22, 2026
ग्वालियर3 घंटे पहले
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ग्वालियर के डबरा में बौद्ध विहार जहां सभी 17 बांग्लादेशियों को रहना बताकर फर्जी पासपोर्ट तैयार कराए गए।
संदिग्ध बांग्लादेशियों के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाए जाने के मामले में ग्वालियर की डबरा थाना पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
एसटीएफ (STF) की जांच में खुलासा हुआ है कि डबरा स्थित बौद्ध बिहार के एक ही पता व एक ही मोबाइल नंबर पर बनाए गए 17 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट आवेदनों का सत्यापन 2021-22 में बिना जमीनी जांच किए ही 'ओके' कर दिए गए थे। यही कारण है कि फर्जी पासपोर्ट कांड में अब डबरा पुलिस के तत्कालीन पुलिस कर्मियों पर तलवार लटक गई है।
एसटीएफ डीआईजी राहुल लोढ़ा के अनुसार, सत्यापन में घोर लापरवाही बरतने पर डबरा के तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और वैरीफिकेशन सेल इंचार्ज प्रधान आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए एसएसपी ग्वालियर को पत्र लिखा है। इसके अलावा पासपोर्ट सेल प्रभारी और प्रक्रिया से जुड़े अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पासपोर्ट सेवा केंद्र का अफसर और नसीम का साथी एसटीएफ के रडार पर
भोपाल से गिरफ्तार फर्जी पासपोर्ट एजेंट नसीम अख्तर से पूछताछ के आधार पर जांच अब पासपोर्ट सेवा केंद्र तक पहुंच गई है। एसटीएफ ने उस पासपोर्ट अधिकारी की जानकारी जुटा ली है, जिससे नसीम की कथित सांठगांठ थी। इसके साथ ही नसीम का एक अन्य साथी भी रडार पर है।
फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले संदिग्धों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ की टीमें दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और असम में लगातार छापेमारी और पड़ताल कर रही हैं।
मौके पर जाकर नहीं की गई तस्दीक, फाइलों पर लिख दिया 'ओके'
वर्ष 2021-22 के दौरान डबरा थाने के पासपोर्ट सेल का प्रभार हवलदार भूपेंद्र गुर्जर के पास था। नियमानुसार आवेदकों के दिए गए पते और दस्तावेजों की मौके पर जाकर भौतिक जांच करने की जिम्मेदारी पासपोर्ट सेल की होती है। लेकिन जांच में सामने आया कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने मौके पर जाए बिना ही फर्जी दस्तावेजों की रिपोर्ट ओके कर दी।
जबकि सभी 17 पासपोर्ट में एक ही पता लिखा था जो बौद्ध विहार था। इतना ही नहीं एक ही मोबाइल नंबर संपर्क का माध्यम था। इसके बाद तत्कालीन टीआई विनायक शुक्ला के हस्ताक्षरों से रिपोर्ट आगे भेज दी गई। एसटीएफ अब यह पता लगा रही है कि किस स्तर पर जानबूझकर या लापरवाही के चलते यह फर्जीवाड़ा हुआ।
बैतूल, भोपाल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भी हुई ऐसी ही लापरवाही
एसटीएफ की जांच के अनुसार, फर्जी पासपोर्ट सत्यापन का यह खेल सिर्फ डबरा तक सीमित नहीं है। राज्य के बैतूल, भोपाल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिलों में भी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते संदिग्धों के पासपोर्ट सत्यापित किए गए।
इन सभी संबंधित दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखे जा रहे हैं।
तत्कालीन TI समेत दो पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच के आदेश
डबरा में बौद्ध भिक्षु बनकर रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाने के मामले में एसटीएफ (STF) ने पुलिस की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है।
एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा ने ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह को पत्र लिखकर मामले से जुड़े दोनों पुलिसकर्मियों (तत्कालीन थाना प्रभारी एवं पासपोर्ट सेल प्रभारी) के खिलाफ प्राथमिक-विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
एसटीएफ का पत्र ग्वालियर पहुंचते ही संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ औपचारिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
'समय पर बारीकी से जांच होती तो तभी पकड़ा जाता फर्जीवाड़ा'
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, यदि पासपोर्ट पुलिस सत्यापन के दौरान पुलिसकर्मी एक ही मोबाइल नंबर और जमा कराए गए संदिग्ध दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर लेते, तो यह इतना बड़ा फर्जीवाड़ा उसी समय उजागर हो जाता।
पुलिस की इस घोर लापरवाही के कारण न केवल फर्जी पासपोर्ट जारी हो गए, बल्कि बांग्लादेशी नागरिक भी पकड़ में आने से बच गए, जो भारत में पहचान छिपाकर बौद्ध भिक्षु के रूप में रह रहे थे।
एक ही नंबर और पते से हुआ था बड़ा खेल
जांच में सामने आया है कि 17 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशियों के पासपोर्ट आवेदनों में एक जैसे दस्तावेजों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया था।
इसके बावजूद स्थानीय पुलिस और पासपोर्ट सेल ने बिना धरातली जांच किए रिपोर्ट को 'क्लियर' (OK) कर आगे बढ़ा दिया था। अब एसटीएफ इस मामले में लापरवाही बरतने वाले हर जिम्मेदार पर शिकंजा कस रही है।
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