
16 किलो के झुमके वर्ल्ड रिकॉर्ड
सोने के गहनों का शौक रखने वालों ने छोटे-बड़े कई तरह के झुमके देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे झुमकों के बारे में सुना है, जिनका वजन 16 किलो से भी ज्यादा हो? दुबई में तैयार किए गए सोने के इन खास झुमकों ने अपनी विशाल बनावट और शानदार कारीगरी से पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. इनका नाम है मयूरा सहस्र (Mayura Sahasra). अपनी खासियत के चलते इस जोड़ी ने दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं.
जॉयअलुक्कास ज्वेलरी (Joyalukkas Jewellery) ने इन झुमकों को 22 कैरेट सोने से तैयार किया है. इन्हें बनाने में कई महीने लगे और दर्जनों कारीगरों ने दिन-रात मेहनत की. आमतौर पर भारतीय शादियों, त्योहारों और खास मौकों पर पहने जाने वाले झुमके आकार में छोटे और पहनने में आसान होते हैं. लेकिन मयूरा सहस्र की बात ही कुछ अलग है. इनका विशाल आकार इन्हें नॉर्मल गहनों से बिल्कुल अलग बनाता है.
16 किलो से भारी झुमकों ने रचा इतिहास
इन झुमकों की लंबाई 1.215 मीटर है, जबकि इनका व्यास 0.682 मीटर है. यानी इनका आकार इतना बड़ा है कि इन्हें देखकर कोई भी हैरान रह जाए. इनकी सबसे बड़ी खासियत सिर्फ इनका वजन नहीं, बल्कि बारीकी से तैयार किया गया डिजाइन भी है. इस खास जोड़ी को बनाने के लिए 55 अनुभवी कारीगरों ने मिलकर काम किया. रिपोर्ट के मुताबिक, इसे तैयार करने में कुल 5,840 घंटे लगे. सोने को आकार देने से लेकर डिजाइन की बारीकियों को उकेरने तक, हर काम में कारीगरों की मेहनत और हुनर दिखाई देता है.
मयूरा सहस्र का डिजाइन भारतीय संस्कृति में खूबसूरती और शालीनता का प्रतीक माने जाने वाले मोर से प्रेरित है. इसमें पारंपरिक दक्षिण एशियाई झुमकों की घंटी जैसी बनावट को बरकरार रखा गया है. इस तरह आधुनिक सोच और पारंपरिक भारतीय गहनों की पहचान को एक साथ पेश करने की कोशिश की गई है. मयूरा का संबंध मोर से है और इसी वजह से इस नाम में भी डिजाइन की खास थीम झलकती है. यह गहना सिर्फ सोने की विशाल मात्रा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि पारंपरिक आभूषणों की कला को एक अलग स्तर पर ले जाने के लिए बनाया गया है.
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, जॉयअलुक्कास ने 12 अक्टूबर को दुनिया में सोने के सबसे भारी जोड़ीदार झुमकों का रिकॉर्ड आधिकारिक तौर पर हासिल किया. इसके साथ ही यह जोड़ी दुनिया के सबसे बड़े झुमकों के रूप में भी पहचानी गई.
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जॉयअलुक्कास ज्वेलरी के सीईओ जॉन पॉल अलुक्कास ने गल्फ न्यूज से बातचीत में बताया कि इस रचना के पीछे दुबई के साथ कंपनी का पुराना जुड़ाव और शहर की शानदार तरक्की भी एक वजह रही है. उन्होंने कहा कि दुबई हमेशा से सोने के शहर के रूप में जाना जाता है. यह रचना इस पहचान को और मजबूत करेगी. दुबई लंबे समय से सोने के कारोबार और शानदार आभूषणों के लिए मशहूर रहा है. ऐसे में मयूरा सहस्र का यहां तैयार होना और रिकॉर्ड बनाना इस शहर की पहचान से भी जुड़ जाता है. सोने, भारतीय परंपरा और कारीगरों की मेहनत का यह अनोखा मेल अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है.
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आयुष कुमार
आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.
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