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16 दिनों में 29 बार हिली धरती, महाराष्ट्र में क्यों आ रहे इतने भूंकप; मुंबई पर भी खतरा?

August 16, 2026

Aug 16, 2026 03:47 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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नासिक और पालघर भारतीय मानक IS 1893 1 के तहत जोन-3 में आते हैं, जो मध्यम भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र को दर्शाता है। इससे पहले पालघर में सितंबर 2023 और फरवरी 2019 में भी इस तरह के स्वार्म देखे जा चुके हैं।

16 दिनों में 29 बार हिली धरती, महाराष्ट्र में क्यों आ रहे इतने भूंकप; मुंबई पर भी खतरा?

महाराष्ट्र में क्यों आ रहे हैं इतने भूंकप?

महाराष्ट्र के नासिक और पालघर जिलों में पिछले दो हफ्तों में लगातार आ रहे छोटे-छोटे भूकंप के झटकों ने चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों ने लगातार हो रही इस भूगर्भीय गतिविधि को भूकंपों का झुंड (Earthquake Swarm) नाम दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 30 जुलाई से 14 अगस्त के बीच महाराष्ट्र में कम से कम 29 झटके दर्ज किए गए। इनमें से अकेले नासिक और उसके आसपास 24, पालघर में 4 और नागपुर में 1 झटका दर्ज किया गया। इन झटकों की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 2.0 से 4.3 के बीच रही, जिनकी गहराई जमीन के नीचे 5 किमी से 8 किमी तक थी। सबसे बड़ा झटका 8 अगस्त को नासिक में दर्ज किया गया था, जिसकी तीव्रता 4.3 थी।

क्या होता है भूकंपों का झुंड?

सामान्य भूकंपीय घटनाओं में एक बड़ा मुख्य भूकंप होता है और उसके बाद छोटे-छोटे झटके आते हैं। इसके विपरीत Earthquake Swarm एक सीमित क्षेत्र में कम समय के भीतर आने वाले छोटे-छोटे भूकंपों की एक श्रृंखला होती है, जिसमें कोई एक मुख्य या अत्यधिक तीव्र भूकंप नहीं होता। इन झटकों की गहराई आमतौर पर जमीन के नीचे केवल 3.5 किमी से 5 किमी के आसपास होती है। यह सिलसिला कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों तक भी जारी रह सकता है।

क्यों आ रहे हैं ये झटके?

IIT बॉम्बे के प्रोफेसर और भूकंप विशेषज्ञ दीपांकर चौधरी के अनुसार, नासिक डेक्कन प्लेटू दक्षिण के पठार क्षेत्र में आता है। यहां मुख्य रूप से बेसाल्टिक चट्टानें पाई जाती हैं। मॉनसून के दौरान इन चट्टानों की दरारों और छिद्रों में बारिश का पानी भर जाता है। जब पानी का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है तो यह चट्टानों की दरारों के माध्यम से छोटे झटकों के रूप में ऊर्जा का निकास करता है। इस प्रक्रिया को हाइड्रो-सीस्मिसीटी कहा जाता है।

नासिक और पालघर भारतीय मानक IS 1893 (भाग 1) के तहत जोन-3 में आते हैं, जो मध्यम भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र को दर्शाता है। इससे पहले पालघर में सितंबर 2023 और फरवरी 2019 में भी इस तरह के स्वार्म देखे जा चुके हैं।

क्या मुंबई पर भी खतरा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि इन झटकों को मॉनिटर करने की जरूरत जरूर है, लेकिन इससे किसी बड़े या भीषण भूकंप के आने का तत्काल खतरा नहीं है। कम गहराई में उत्पन्न होने के कारण इन झटकों की तरंगे बहुत दूर तक यात्रा नहीं कर पाती हैं और तेजी से कमजोर पड़ जाती हैं। यही कारण है कि नासिक में आ रहे इन झटकों का कोई गंभीर प्रभाव मुंबई जैसे दूर स्थित शहरों पर नहीं पड़ेगा।