बंगाल में अभी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के आंकड़े सामने आ रहे थे कि इसी बीच महाराष्ट्र में मतदाता सूची के SIR के बाद सामने आए आंकड़ों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है. राज्य की 288 विधानसभा सीटों की मतदाता सूची का मसौदा 31 अगस्त को जारी किया गया. इसके मुताबिक, महाराष्ट्र में कुल 9 करोड़ 78 लाख 54 हजार 49 मतदाता दर्ज थे. इनमें से 7 करोड़ 71 लाख 65 हजार 562 लोगों के नाम मसौदा सूची में शामिल किए गए हैं. वहीं, 2 करोड़ 6 लाख 88 हजार 487 मतदाताओं के नाम फिलहाल सूची से बाहर हो गए हैं. यानी करीब 21.14 फीसदी मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं. इस मुद्दे पर राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर हमला किया है.
SIR के इन आंकड़ों को अगर 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से जोड़कर देखा जाए तो तस्वीर और भी दिलचस्प नजर आती है. महाराष्ट्र की 15 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां हटाए गए मतदाताओं की संख्या उस सीट पर जीत के अंतर से कहीं ज्यादा है. यानी इन सीटों पर जितने वोटों से उम्मीदवार जीता था, उससे कई गुना ज्यादा नाम मौजूदा ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हैं. खास बात ये है कि इन 15 सीटों में से 12 सीटों पर इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों ने 2024 में जीत दर्ज की थी.
आंकड़ों पर उठ रहे सवाल
इनमें नासिक, अहिल्यानगर, सोलापुर, अमरावती, नांदेड़, जालना, बीड, लातूर और परभणी शामिल हैं. वहीं संभाजीनगर, जलगांव और अकोला में बीजेपी या उसके सहयोगी उम्मीदवार विजेता रहे थे. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने का चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ सकता है. इन आंकड़ों में सबसे ज्यादा ध्यान नासिक और संभाजीनगर पर जाता है. नासिक में 10 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए हैं, जबकि लोकसभा चुनाव में जीत का अंतर करीब 1.62 लाख वोट था. इसी तरह संभाजीनगर में 6 लाख से ज्यादा नाम हटे, जबकि जीत का अंतर करीब 1.35 लाख वोट था.
- महाराष्ट्र में SIR के बाद 2.06 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए हैं, जो कुल मतदाताओं का 21.14% है.
- 15 लोकसभा सीटों पर हटाए गए नाम 2024 के चुनावी जीत के अंतर से ज्यादा हैं, इनमें 12 सीटें इंडिया गठबंधन ने जीती थीं.
- नासिक में 10.27 लाख और संभाजीनगर में 6.07 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए, जबकि दोनों सीटों पर जीत का अंतर इससे काफी कम था.
- देशभर में करीब 9.92 करोड़ नाम ड्राफ्ट प्रक्रिया में बाहर हुए हैं; महाराष्ट्र 2.06 करोड़ नामों के साथ बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में है.

महाराष्ट्र SIR में करोड़ों वोटर के नाम बाहर (Getty Image)
राहुल गांधी ने भी उठाएं हैं सवाल
राहुल गांधी ने भी इस मामले पर सोशल मीडिया के जरिए आवाज उठाई है. उन्होंने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर लिखा, ‘भाजपा और ‘वोट चोरी आयोग’ के तरीके बदलते रहते हैं और बदलते रहेंगे, मकसद बस एक ही है किसी भी कीमत पर BJP की जीत, और भारत के लोकतंत्र का अंत. महाराष्ट्र 2024- लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच अचानक 39 लाख नए वोटर जुड़ गए. मैंने तब भी कहा था, आज भी कहता हूं, यह वोट चोरी थी. बंगाल 2026- SIR में जिन नामों को काटा गया, उनमें से 91% नाम अपील के बाद वापस जोड़ने पड़े. यानी हर 10 में से 9 नाम गलत तरीके से काटे गए और नाम चुनाव के बाद ही जोड़े गए.’
आगे उन्होंने लिखा कि मैंने तब भी कहा था, आज भी कहता हूं, यह वोट चोरी थी. अब महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं को ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिया गया है- यानी हर पांचवां वोटर. लोक सभा 2024: 9.29 करोड़, विधान सभा 2024: 9.7 करोड़, SIR 2026: 7.78 करोड़, कौन सी लिस्ट सही थी? वोट चोरी से बनी सरकार के लिए जनता जरूरी नहीं है – यही कारण है कि ये BJP न जनता की सुनती है, न उनका आदेश मानती है.
बीड में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला अंतर
बीड लोकसभा सीट का आंकड़ा खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा हुआ है. दरअसल, यहां 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत सिर्फ 6,553 वोटों के अंतर से हुई थी. इस सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) को जीत हासिल हुई थी, वहीं बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था. इसके मुकाबले SIR के ड्राफ्ट में 2,40,407 नाम शामिल नहीं हैं. यानी हटे हुए नामों की संख्या चुनावी जीत के अंतर से कई गुना ज्यादा है.

लोकसभा जीत के मार्जिन से ज्यादा (Getty Image)
अहिल्यानगर और अमरावती जैसी सीटों पर भी जीत का अंतर काफी कम था और हटाए गए नामों की संख्या उससे बहुत अधिक है. हालांकि, SIR में नाम हटने के पीछे अलग-अलग वजह भी हो सकती है. जिसमें किसी मतदाता की मृत्यु हो चुकी हो सकती है, कोई व्यक्ति दूसरे शहर या राज्य में जा चुका हो सकता है, किसी का नाम दो जगह दर्ज हो सकता है या फिर SIR का फॉर्म समय पर जमा नहीं हुआ हो सकता है.
महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट से बाहर
महाराष्ट्र के कुल आंकड़े भी काफी बड़े हैं. राज्य में करीब 9.78 करोड़ मतदाताओं में से 7.71 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची में हैं. वहीं 2.06 करोड़ से ज्यादा नाम फिलहाल शामिल नहीं किए गए हैं. फीसदी के हिसाब से यह संख्या 21.14 फीसदी बैठती है. छत्रपति संभाजीनगर संभाग और मराठवाड़ा में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं. सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, मराठवाड़ा के आठ जिलों से कुल 21,41,129 नाम वोटर लिस्ट से बाहर हुए हैं. छत्रपति संभाजीनगर जिले में सबसे ज्यादा 6,07,660 नाम हटाए गए हैं. नांदेड़ में भी करीब 3.88 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं.
नासिक में 10 लाख वोट कटेंगे, यहां 3 सीटें
नासिक जिले 10 लाख वोट कट सकते हैं. यहां पर लोकसभा की 3 सीटें हैं. धुले, डिंडौरी और नासिक. धुले में कांग्रेस को 2024 के चुनाव में 3 हजार वोटों से जीत मिली थी. इसी तरह नासिक में उद्धव की शिवसेना को 1 लाख 62 हजार वोटों से जीत मिली थी. डिंडोरी में शरद पवार के उम्मीदवार भास्कर बागले ने 1.13 लाख वोटों से जीत हासिल की थी.
तीनों ही जगहों पर जीत का मार्जिन 2.5 लाख के करीब था. यानी यहां पर इंडिया गठबंधन को एनडीए के उम्मीदवारों से 2.5 लाख ज्यादा वोट मिले थे. अब नासिक जिले में 10 लाख वोट कट सकते हैं.
संभाजीनगर में 6 लाख वोट कटेंगे, यहां 2 सीटें
इसी तरह संभाजीनगर में 6 लाख से ज्यादा वोट कट सकते हैं. SIR ड्राफ्ट में इन वोटरों को डिलीट लिस्ट में शामिल किया गया है. संभाजीनगर जिले में लोकसभा की 2 सीटें हैं. एक जालना और एक औरंगाबाद. जालना में 2024 में कांग्रेस को जीत मिली थी. वहीं औरंगाबाद में शिवसेना (शिंदे) के उम्मीदवार को जीत मिली थी.
शिवसेना के उम्मीदवार को 1 लाख 34 हजार वोटों से जीत मिली थी. इसी तरह जालना में कांग्रेस के कल्याण काले ने बीजेपी के राव साहब दानवे को 1 लाख 13 हजार वोटों से हराया था.
अब चार्ट में देखिए, जिले में वोट कितने कटेंगे और जीत का मार्जिन क्या था?
| लोकसभा सीट | वोट कटेंगे | जीत | रनरअप | मार्जिन | |
| 1. | संभाजीनगर | 607660 | SS | AIMIM | 1,34,650 |
| 2. | नासिक | 1027792 | SS(UBT) | SS | 1,62,001 |
| 3. | अहिल्यानगर | 426895 | NCP-SP | BJP | 28,929 |
| 4. | सोलापुर | 622915 | INC | BJP | 74,197 |
| 5. | जलगांव | 514743 | BJP | SS(UBT) | 2,51,594 |
| 6. | अमरावती | 343282 | BJP | BJP | 19,731 |
| 7. | अकोला | 276992 | BJP | INC | 40,626 |
| 8. | नांदेड़ | 388352 | INC | BJP | 59,442 |
| 9. | जालना | 243183 | INC | BJP | 1,09,958 |
| 10. | बीड | 240407 | NCP-SP | BJP | 6,553 |
| 11. | लातूर | 214442 | INC | BJP | 61,881 |
| 12 | परभणी | 180231 | SS(UBT) | RSPS | 1,34,061 |
देशभर में करीब 9.92 करोड़ नाम हटे
SIR का असर सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक देशभर में करीब 9.92 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट प्रक्रिया में बाहर हुए हैं. इनमें महाराष्ट्र के 2.06 करोड़ से ज्यादा नाम भी शामिल हैं. दिल्ली में करीब 47.56 लाख और पश्चिम बंगाल में करीब 58.20 लाख नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है.
इन आंकड़ों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई जा रही है जो या तो दूसरे स्थान पर चले गए हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है. इसलिए अभी इन आंकड़ों को अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी. जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे तय प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराकर अपना नाम वापस जुड़वा सकते हैं.
राजनीतिक असर पर नजर
राजनीतिक रूप से यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि महाराष्ट्र की जिन 15 लोकसभा सीटों पर हटाए गए नाम जीत के अंतर से ज्यादा हैं, उनमें 12 सीटें इंडिया गठबंधन के पास गई थीं. खासकर बीड, अमरावती और अहिल्यानगर जैसी सीटों पर जीत का अंतर काफी कम था. ऐसे में विपक्ष की नजर इस पूरी प्रक्रिया पर रहेगी. देशभर की बात करें, तो SIR में सबसे ज्यादा नाम कटने वाले राज्यों में दिल्ली का नाम सबसे ऊपर है, वहीं महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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