उत्तराखंड में मानसून से टूटी सड़कों को ठीक करने के लिए सीएम धामी ने 15 अक्टूबर की डेडलाइन तय की है। तय सीमा के बाद मुख्यमंत्री खुद धरातल पर उतरकर गुणवत्ता की जांच करेंगे।
दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : मानसून की विदाई की सुगबुगाहट के बीच उत्तराखंड शासन ने बदहाल परिवहन तंत्र को पटरी पर लाने के लिए कमर कस ली है। लोक निर्माण विभाग (PWD) समेत सड़क निर्माण से जुड़ी तमाम एजेंसियों को 15 अक्टूबर तक हर हाल में प्रदेश के सभी मार्गों को गड्ढामुक्त (Pothole Free) करने का कड़ा निर्देश जारी हुआ है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक चेतावनी दी है कि डामरीकरण के नाम पर केवल खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तय समयसीमा बीतने के बाद मुख्यमंत्री स्वयं जमीनी हकीकत परखने के लिए औचक निरीक्षण करेंगे।
पर्वतीय संपर्क मार्गों से लेकर चारधाम रूट पर फोकस
पहाड़ी जिलों में सड़कें महज आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि आम जनजीवन की जीवनरेखा हैं। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत इलाकों में हालिया अतिवृष्टि और भूस्खलन के चलते दर्जनों संपर्क मार्ग बुरी तरह टूट चुके हैं। कई जगह पूरी सड़क ही मलबे में समा गई थी।
शासन ने स्पष्ट किया है कि मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ उन ग्रामीण रास्तों पर पहले काम होगा, जिनसे अस्पताल, स्कूल और तहसील मुख्यालय जुड़े हैं। मैदानी जिलों—देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में जलभराव की वजह से उधड़ चुकी डामर की परतों को तेजी से बदला जा रहा है। जहां हल्का नुकसान है, वहां त्वरित पैचवर्क होगा; लेकिन जहां नींव धंसी है, वहां नए सिरे से री-कारपेटिंग की जाएगी।
कागजी रिपोर्ट नहीं, थर्ड पार्टी क्वालिटी चेक की तैयारी
सड़कों के निर्माण में लीपापोती की पुरानी शिकायतों को देखते हुए इस बार मॉनिटरिंग का ढांचा बदला गया है। इंजीनियरों को सिर्फ मुख्यालय बैठकर प्रगति रिपोर्ट भेजने की छूट नहीं होगी।
गुणवत्ता जांचने के लिए विभागीय स्तर पर औचक सैंपलिंग के निर्देश हैं। अगर नई बनी सड़क पहली ही बारिश या हल्के दबाव में उखड़ गई, तो संबंधित अधिशासी अभियंता (EE) और ठेकेदार के खिलाफ वित्तीय वसूली और विभागीय दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। और हां—लापरवाही किसी भी स्तर पर छिप नहीं सकेगी, क्योंकि निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के डैशबोर्ड से जुड़ी है।
पहाड़ से मैदान तक सभी 13 जिलों में जिलाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तलब की जा रही है, ताकि 15 अक्टूबर के बाद त्योहारों के सीजन में आम जनता को हिचकोलों से मुक्ति मिल सके।