
मुंबई में ऑटो चालक परेशान
Mumbai News: मुंबई में ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की अनिवार्यता को लेकर नया विवाद सामने आया है. ऑटो चालकों का आरोप है कि उन्होंने निर्धारित सिलेबस के मुताबिक मराठी भाषा सीखी, लेकिन जांच के दौरान उनसे ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं, जिनका पाठशाला में उन्हें प्रशिक्षण नहीं दिया गया. इससे बड़ी संख्या में ऑटो चालक परेशान हैं और कई ने कार्रवाई के डर से अपना ऑटो चलाना तक बंद कर दिया है.
ऑटो चालकों के मुताबिक, मराठी भाषा सीखने के लिए उन्हें चार दिन की पाठशाला में रोजाना करीब चार से पांच घंटे ट्रेनिंग दी गई. इस दौरान 15 सवालों का एक निर्धारित सिलेबस उन्हें पढ़ाया गया. बताया जा रहा है कि यह सिलेबस ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की ओर से मराठी भाषा की पाठशालाओं, यूनियन कार्यालयों और आरटीओ कार्यालयों को भेजा गया था.
इस सिलेबस में रोजमर्रा की बातचीत से जुड़े आसान सवाल शामिल हैं. जैसे- आपका नाम क्या है, क्या आपके पास छुट्टे पैसे हैं, क्या आपके पास QR कोड है और गाड़ी तेज गति से न चलाने जैसी सामान्य बातें. कई ऑटो चालक अब इन सवालों के जवाब मराठी में देने में सक्षम हैं. कुछ चालकों ने बातचीत के दौरान मराठी में जवाब देकर भी अपनी तैयारी दिखाई.
‘सिलेबस के बाहर से पूछा सवाल’
लेकिन ऑटो चालकों का आरोप है कि आरटीओ की जांच के दौरान उनसे सिलेबस से अलग सवाल पूछे जा रहे हैं. कई चालकों का कहना है कि उनसे उनके गांव, परिवार और व्यक्तिगत जानकारी से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं. ऐसे सवालों की उन्हें पाठशाला में तैयारी नहीं कराई गई, जिसके चलते वे जवाब देते समय उलझ जाते हैं. टीवी9 भारतवर्ष की चौपाल में शामिल ऑटो चालकों ने बताया कि वे मूल रूप से प्रयागराज, वाराणसी, जौनपुर और सुल्तानपुर जैसे जिलों से हैं, लेकिन कई लोग पिछले 20 से 25 वर्षों से मुंबई में रह रहे हैं.
उनका कहना है कि वे मुंबई में ही रहते हैं, यहां के मतदाता हैं और वर्षों से ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. ऑटो चालकों ने सवाल उठाया कि चुनाव के समय राजनीतिक दल उनसे यह नहीं पूछते कि उन्हें मराठी आती है या नहीं. उनका कहना है कि अगर भाषा के आधार पर रोजगार में सख्ती की जा रही है तो नियम स्पष्ट और निर्धारित सिलेबस के अनुसार होने चाहिए.
ऑटो यूनियन ने जताई नाराजगी
ऑटो यूनियन ने भी कथित सख्ती पर नाराजगी जताई है. यूनियन का कहना है कि आरटीओ अधिकारियों को ऑटो चालकों को परेशान नहीं करना चाहिए और निर्धारित सिलेबस से बाहर के सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए. यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि कथित तौर पर जोर-जबरदस्ती जारी रही तो आंदोलन किया जा सकता है.
ऑटो चालकों का यह भी आरोप है कि मराठी जांच के नाम पर लाइसेंस और परमिट की जांच की जा रही है. कुछ मामलों में दूसरे व्यक्ति के नाम पर ऑटो चलाने वाले चालकों से चालान वसूले जाने की बात भी सामने आई है. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित आरटीओ अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है.
आरटीओ की कार्रवाई से परेशान चालाक
इस विवाद का असर मुंबई की सड़कों पर भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. कई ऑटो चालकों ने आरटीओ की कार्रवाई के डर से ऑटो चलाना बंद कर दिया है. ऐसे में ऑटो की उपलब्धता प्रभावित होने और यात्रियों को परेशानी होने की बात भी सामने आ रही है. अब सवाल यह है कि मराठी भाषा की परीक्षा निर्धारित सिलेबस के आधार पर होगी या जांच का दायरा आगे भी बढ़ता रहेगा.

जयप्रकाश सिंह
जयप्रकाश सिंह का नाम देश के चुनिंदा क्राइम रिपोर्टर में आता है. लंबे समय से टीवी जर्नलिस्ट के तौर पर सेवाएं जारीं. करीब तीन दशकों से सक्रिय पत्रकारिता का हिस्सा. प्रोड्यूसर, एंकर और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में मुंबई से कार्यरत. इसके पहले 2012 से 2022 तक मुंबई में इंडिया टीवी के ब्यूरो चीफ रहे. 2005 से 2012 तक नेटवर्क18 ग्रुप के आईबीएन7 चैनल में डिप्टी ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली. 2004 से 2005 तक सहारा समय मुंबई में बतौर सीनियर स्पेशल कॉरस्पॉन्डेंट काम किया. 2002 से 2004 तक मुंबई ब्यूरो में बीएजी फिल्म्स के चीफ रहे. नवभारत टाइम्स मुंबई में 1997 में जॉइन किया और यहां 2 साल काम किया. इससे पहले भी चार संस्थानों में काम किया.
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