Gandak River: नेपाल के जल-ग्रहण क्षेत्रों में कम समय में हुई अत्यधिक बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 28 सितंबर की सुबह 6 बजे 5 लाख 43 हजार 500 क्यूसेक जलश्राव छोड़ा गया।
Gandak River: नेपाल के जल-ग्रहण क्षेत्रों में कम समय में हुई अत्यधिक बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 28 सितंबर की सुबह 6 बजे 5 लाख 43 हजार 500 क्यूसेक जलश्राव छोड़ा गया।
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Gandak River: नेपाल के जल-ग्रहण क्षेत्रों में कम समय में हुई अत्यधिक बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 28 सितंबर की सुबह 6 बजे 5 लाख 43 हजार 500 क्यूसेक जलश्राव छोड़ा गया। इसके बाद गंडक का पानी पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के निचले इलाकों से होकर गुजर रहा है।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर नदी का जलश्राव करीब 13 घंटे तक 5 लाख क्यूसेक से अधिक रहा। वहीं करीब 32 घंटे तक 4 लाख क्यूसेक से ज्यादा जलश्राव दर्ज किया गया। गंडक के जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश के साथ-साथ बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी 26 और 27 सितंबर के बीच काफी वर्षापात हुआ। इसका असर गंडक नदी के निचले इलाकों में भी देखने को मिला, जहां पहले से ही नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था।
2024 का रिकॉर्ड टूटा, बगहा में 91.25 मीटर पहुंचा जलस्तर
इस बार गंडक बराज से छोड़ा गया पानी वर्ष 2024 के अधिकतम जलश्राव 5 लाख 62 हजार 500 क्यूसेक से कुछ कम रहा। इसके बावजूद बगहा गेज स्थल पर नदी ने नया उच्चतम जलस्तर दर्ज किया है। बगहा में गंडक नदी का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया। यह अब तक का सबसे अधिक जलस्तर है। इससे पहले वर्ष 2024 में यहां अधिकतम जलस्तर 90.90 मीटर दर्ज किया गया था। यानी इस बार पुराना रिकॉर्ड 0.35 मीटर बढ़ गया।
तटबंधों पर दबाव, 169 जगहों पर सीपेज और पाइपिंग
गंडक में अत्यधिक जलश्राव के कारण नदी के तटबंधों पर भारी दबाव बना हुआ है। कई स्थानों पर सीपेज, पाइपिंग और ओवरटॉपिंग की स्थिति सामने आई। जल संसाधन विभाग के अनुसार, अब तक 169 स्थानों पर सीपेज और पाइपिंग की समस्या सामने आई, जिन पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सुरक्षित किया गया है।
चंपारण तटबंध दो जगह क्षतिग्रस्त
बढ़े हुए जलस्तर के बीच 28 और 29 सितंबर की मध्यरात्रि में पश्चिम चंपारण जिले में गंडक नदी के बाएं तट पर बने चंपारण तटबंध को दो स्थानों पर नुकसान पहुंचा। पहला स्थान खैरतवा गांव, प्रखंड बगहा-1 है, जबकि दूसरा स्थान फुलियाखाड़ गांव, प्रखंड बैरिया में है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी के दाएं तट पर बना तटबंध भी एक स्थान पर क्षतिग्रस्त हुआ है।
बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में जुटी टीमें
तटबंधों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए जल संसाधन विभाग और पश्चिम चंपारण जिला प्रशासन की टीमें लगातार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में जुटी हैं। क्षेत्रीय अभियंताओं को मौके पर लगाया गया है और संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी की जा रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यालय से रात में ही कार्यपालक अभियंता की अध्यक्षता में चार दलों को बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज भेजा गया है। इसके अलावा अप्रत्याशित जलश्राव को देखते हुए पहले से ही अतिरिक्त अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति संवेदनशील स्थानों पर की गई है।
अपस्ट्रीम में पानी घट रहा
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, फिलहाल अपस्ट्रीम में जलस्तर घटने, जबकि डाउनस्ट्रीम में बढ़ने की प्रवृत्ति बनी हुई है। विभाग के वरीय पदाधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और तटबंधों की निगरानी की जा रही है।
गंडक के बढ़े जलस्तर को देखते हुए पश्चिम चंपारण से लेकर गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली तक नदी के निचले इलाकों में स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।