
सिकंदर रजा के बेटे का कमाल (Photo: x/pti)
जैसा बाप, वैसा बेटा. वो तो आपने सुना ही होगा. उसकी ही मिसाल हैं 13 साल के ईसा बट्ट. अपने पिता की ही तरह ईसा बट्ट ने भी क्रिकेट के मैदान पर झंडे गाड़ने शुरू कर दिए हैं. अब आप सोच रहे होंगे ईसा बट्ट हैं कौन और किनके बेटे हैं? ये जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के कप्तान सिकंदर रजा के बेटे हैं और फिलहाल 20 छक्कों के साथ खेली 279 रन वाली अपनी बेमिसाल पारी को लेकर चर्चा में हैं.
20 छक्के, 30 चौके, 279 रन
13 साल के ईसा बट्ट ने अंडर 14 क्रिकेट टूर्नामेंट में धमाका किया है. मैच के दौरान ईसा बट ने हेलेनिक एके़डमी की तरफ से खेलते हुए CBC के खिलाफ सिर्फ 146 गेंदों में 279 रनों की शानदार पारी खेली. 191.10 की स्ट्राइक रेट से खेली उनकी पारी में 20 छक्के तो बरसे ही उसके अलावा 30 चौके भी शामिल रहे.
👀 The son of Zimbabwes Sikandar Raza has just scored a mammoth 279 (146) including 30 fours and 20 sixes for Hellenic Academy U14 against CBC.
One of the finest ever Zimbabwe Schools batting displays 🔥 pic.twitter.com/7shIPzY8fB
— Adam Theo🇿🇼🏏 (@AdamTheofilatos) September 26, 2026
पिता की तरह अपनी टीम के कप्तान हैं ईसा बट्ट
इंटरनेशनल क्रिकेट में जैसे सिकंदर रजा जिम्बाब्वे की टीम की कप्तानी करते हैं ठीक वैसे ही ईसा बट्ट भी अपनी टीम हेलेनिक एके़डमी के कप्तान हैं. कप्तानी के अलावा ईसा विकेटकीपर भी हैं. मतलब अपने ऑलराउंडर पिता के जैसे वो भी मल्टीस्किल्स प्लेयर हैं.
विराट, एबी आदर्श… पिता के साथ एक मैच खेलने की तमन्ना
ईसा बट्ट पिता सिकंदर रजा को अपना आदर्श मानते हैं. वहीं विराट कोहली, एबी डीविलियर्स और बाबर आजम जैसे क्रिकेटर उनके पसंदीदा हैं. एक इंटरव्यू के दौरान ईसा बट्ट ने अपनी तमन्ना जाहिर करते हुए कहा था कि वो अपने पिता के साथ एक मैच खेलना चाहते हैं,
ईसा बट्ट के मुताबिक उनके पिता की उम्र बढ़ रही है. वो रिटायरमेंट के पड़ाव के करीब पहुंच रहे हैं. वो उम्मीद करेंगे जब तक वो 18 साल के हों तब तक उनके पिता कम से कम एक फॉर्मेट में खेलते रहें. ईसा बट्ट ने कहा कि वो अपने पिता के साथ एक मैच खेलना चाहते हैं. उसके बाद वो रिटायर हो सकते हैं.

साकेत शर्मा
'कौन बनेगा करोड़पति' गेम शो से शुरू हुआ सफर न्यूज नेशन, इंडिया न्यूज, इंडिया डॉट कॉम और Editorji जैसे पड़ावों से गुजरा. इसी कड़ी में पिछले 5 सालों से मैं TV9 हिंदी के साथ जुड़ा हूं. यहां भी खेल की खबरों को बताना मेरा काम है. TV, डिजिटल और प्रोडक्शन हाउस, तीनों ही दुनिया की समझ और कुल मिलाकर एक दशक से भी ज्यादा का मेरे पास अनुभव है. हर रोज कुछ नया सीखने और नई क्रिएटिव चीज करने की कोशिश करता हूं. असफलता से घबराता नहीं और सफलता पर इतराता नहीं. बस कोशिश यही करता हूं कि हमेशा अपना बेस्ट दे सकूं. आज तक यही करता आया हूं और आगे भी इरादा ऐसा ही है. फिर चाहे काम डेस्क पर बैठकर खेल की खबरों को अपने शब्दों में पिरोने का हो या फिर फील्ड में उतरकर उसे कैमरे पर उतारने का. सीधी भाषा में कहें तो मैं खेल के मैदान पर होने वाली हर हलचल को आपतक पहुंचाने वाला एक खिलाड़ी हूं.
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