Bhopal Management College Scholarship Scam: भोपाल के अकादमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज में 99.48 लाख रुपए का स्कॉलरशिप घोटाला सामने आया है।
मध्यप्रदेश में यूको बैंक के जोनल हेड लोकेश कुमार से मिली लिखित शिकायत के आधार पर भोपाल स्थित सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन एवं एंटी करप्शन ब्यूरो में एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के लिए पूरा मामला CBI, ACB, भोपाल के इंस्पेक्टर नाजिम खान को सौंपा गया है। तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा के संबंध में UCO बैंक के सक्षम अधिकारी से PC एक्ट की धारा 17-A के तहत पूर्व मंजूरी मिल गई है।
सीबीआई और एसीबी ने साकेत नगर निवासी हबीबगंज स्थित यूको बैंक शाखा की तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा पति गोपाल कुमार वर्मा, अरेरा कॉलोनी ई-1 निवासी अकादमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज डायरेक्टर विनय पिता तिलक मल्होत्रा, आदित्य पिता तिलक मल्होत्रा, इंडस रीजेंसी B-1 निवासी असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज पिता किशन चंद जैन, लहरपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी विनेश पिता राम चंद मेश्राम और राजगढ़ जिले के जीरापुर तहसील में ग्राम खेजड़िया निवासी तत्कालीन कर्मचारी राम सिंह पिता हरि सिंह वर्मा सहित अन्य 7 लोगों की भूमिका की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।
जनवरी 2020-अक्टूबर 2021 के बीच खोले फर्जी बैंक खाते
डीजीएम द्वारा की गई शिकायत में बताया गया कि भोपाल के हबीबगंज स्थित यूको बैंक शाखा में 1 जनवरी 2020 से 31 अक्टूबर 2021 के बीच बैंक शाखा में अलग-अलग 118 फर्जी अकाउंट खोले गए थे। इसमें सरकार से मिली 99.48 लाख रुपए की स्कॉलरशिप जमा की गई। जिसे तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा से मिलीभगत कर मैनेजमेंट कॉलेज के डायरेक्टर और असिस्टेंट प्रोफेसर सहित अन्य कर्मचारियों की मदद निकालकर गबन कर लिया।
SM की खाते खोलने से ATM जारी करने तक थी जिम्मेदारी
सीबीआई और एसीबी ने शिकायत की जांच में पाया कि यह बैंक अकाउंट्स मैनेजमेंट कॉलेज के एमबीए स्टूडेंट्स की बिना जानकारी और सहमति के खोले गए थे। जांच में मिले तथ्यों के अनुसार, तत्कालीन सीनियर मैनेजर प्रेमा वर्मा को इन सभी खातों को खोलने, KYC पूरा करने, सिस्टम वेरिफिकेशन और ATM जारी करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
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हस्ताक्षर, डॉक्यूमेंट्स नकली, गलत डिटेल, KYC नहीं किया
जांच में यह भी पता चला कि इन खातों के लिए अकाउंट ओपनिंग फॉर्म (AOF) में नकली हस्ताक्षर और गलत जानकारी भरी गई थी, जबकि जरूरी KYC वेरिफिकेशन नहीं किया गया था। मैनेजमेंट कॉलेज द्वारा जारी किए गए बोनाफाइड सर्टिफिकेट का इस्तेमाल सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स के तौर पर किया गया था, जो जांच करने पर नकली पाए गए।
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कॉलेज कर्मचारी को सौंप दिए थे सभी ATM, डेबिट कार्ड
असली खाताधारकों से लिखित मंजूरी लिए बिना ही ATM और डेबिट कार्ड जारी किए गए। सभी 118 अकाउंट्स के एटीएम और डेबिट कार्ड कॉलेज के तत्कालीन कर्मचारी राम सिंह वर्मा को सौंप दिए गए। आरोपी अधिकारियों और उनके साथियों के मोबाइल नंबर धोखाधड़ी से स्टूडेंट्स के खातों से जोड़े गए, ताकि OTP प्राप्त हो सके और स्कॉलरशिप की रकम निकाली जा सके।
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