खनन विभाग के नाम पर सड़कों पर अवैध वसूली का नंगा नाच चलाने वाले दो शातिर ठग आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गए हैं। तलवाड़ा, हाजीपुर और मुकेरियां के इलाकों में खुद को माइनिंग अधिकारी बताकर टिपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों से हफ्ता वसूली करने वाले दो आरोप
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चौंकाने वाली बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े का पर्दाफाश माइनिंग विभाग की टीम और टिपर यूनियन ने खुद किया, जिसके बाद बैकफुट पर आई हाजीपुर पुलिस को मामला दर्ज करना पड़ा।
'चौहान टैक्सी' की रसीद काट वसूले जा रहे थे पैसे
टिपर यूनियन हाजीपुर व मुकेरियां के प्रधान बलराज सिंह ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि 26 जुलाई की रात से ब्रेजा कार में सवार होकर दो व्यक्ति मुकेरियां-तलवाड़ा रोड और हाजीपुर-दसूहा मार्ग पर बाकायदा अवैध नाके लगा रहे थे। वे खुद को माइनिंग अफसर बताकर भारी वाहनों को रोकते, चालकों को केस में फंसाने की धमकियां देते और प्रति वाहन 1,000 से 2,000 रुपये तक ऐंठते थे। हफ्ता वसूली के बदले वे चालकों को "चौहान टैक्सी" के नाम की फर्जी रसीदें थमा देते थे।
यूनियन और माइनिंग विभाग ने बिछाया जाल, रंगे हाथों दबोचे
29 जुलाई को यूनियन द्वारा लिखित शिकायत मिलने के बाद एसडीओ माइनिंग मुकेरियां हरजिंदर पाल सिंह, जेई नीतिश और हरदीप सिंह की टीम ने जाल बिछाया। बुधवार देर रात टिपर चालकों के सहयोग से दोनों ठगों को उनकी ब्रेजा कार समेत रंगे हाथों दबोचकर हाजीपुर पुलिस के हवाले कर दिया गया।
पुलिस की ढिलाई पर भड़की यूनियन, तब दर्ज हुई एफआईआर
आरोपियों को पकड़े जाने के बावजूद हाजीपुर पुलिस 30 जुलाई तक मामला दर्ज करने में हीला-हवाली करती रही। पुलिस की इस सुस्त कार्यप्रणाली से आक्रोशित होकर टिपर यूनियन ने मुकेरियां में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया। यूनियन ने आरोप लगाया कि ये वही शातिर ठग हैं जो पहले पठानकोट में फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बनकर अवैध वसूली कर चुके हैं।
यूनियन के भारी दबाव और किरकिरी के बाद हाजीपुर पुलिस ने आखिरकार दोनों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान फर्जी माइनिंग अफसर बने रविंदर सिंह (पुत्र महिंगा राम) और उसके ड्राइवर हरप्रीत सिंह (पुत्र किशन सिंह), निवासी बल्लो चौहान (थाना मुकेरियां) के रूप में हुई है। पुलिस अब इस पूरे गिरोह की परतें खंगाल रही है।