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न्यूयॉर्क से टोरंटो और अब लंदन... 100 साल के RSS का दुनिया से संवाद, मोहन भागवत के दौरे में क्या खास?

September 4, 2026

न्यूयॉर्क से टोरंटो और अब लंदन... 100 साल के RSS का दुनिया से संवाद, मोहन भागवत के दौरे में क्या खास?

संघ प्रमुख मोहन भागवत. (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है. इसी कड़ी में विदेशों में कार्यक्रम कर रहा है, जिसके तहत आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 2 से 7 सितंबर तक लंदन के दौरे पर हैं. आएएसएस के मीडिया और संचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ की स्थापना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी. उनका मानना ​​था कि राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के बाद उसे बनाए रखने के लिए एक मजबूत और एकजुट समाज का होना जरूरी है. पिछली एक सदी में यह संगठन एक सभ्यतागत आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जिसे पूरे भारत में समाज सेवा में लगे स्वयंसेवक चलाते हैं.

सेवा की एक सदी

पिछली एक सदी में RSS ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी दुनिया एक परिवार है की अवधारणा पर सामुदायिक सेवा की भावना विकसित की है. इसमें व्यक्तिगत चरित्र-निर्माण की परंपरा अहम है, जिसे संघ व्यापक सामुदायिक मजबूती का आधार मानता है. संघ की 202526 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे देश में 1 लाख 52 हजार से अधिक सेवा पहलें चल रही हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, समाज कल्याण, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक जीवन के अन्य क्षेत्र शामिल हैं. पूरे भारत में संघ की 1 लाख 34 हजार से अधिक नियमित स्थानीय बैठकें होती हैं, जिनमें दैनिक शाखाएं (स्थानीय RSS बैठकें) और साप्ताहिक व मासिक बैठकें शामिल हैं.

संघ अपने दृष्टिकोण को साझा सभ्यतागत मूल्यों, विविधता में एकता और सामाजिक सद्भाव पर केंद्रित बताता है. इसका काम सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना है और यह हर तरह के विभाजन, कट्टरपंथ और हिंसा को खारिज करता है. अपनी शताब्दी के लिए, संगठन ने पांच प्राथमिकताएं (सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता और नागरिक जिम्मेदारी) तय की हैं. संघ का मानना है कि इनसे पूरे समाज को लाभ होगा.

सभ्यतागत संवाद का विस्तार

अपने शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने दुनिया भर के समुदायों और संस्थानों के साथ सभ्यतागत संवाद के एक ज़्यादा दिखाई देने वाले कार्यक्रम के जरिए अपने अनुभव साझा करने की कोशिश की है. इस पहल का एक अहम चरण अप्रैल 2026 में आगे बढ़ाया गया, जब संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी का दौरा किया.

उनके कार्यक्रमों में लंदन में चैथम हाउस, अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और हडसन इंस्टीट्यूट और बर्लिन में जर्मनी के प्रमुख नीतिगत संस्थानों के साथ-साथ शिक्षाविदों, सांसदों, व्यापारिक नेताओं, समुदाय के प्रतिनिधियों और भारतीय मूल के लोगों के साथ चर्चा शामिल थी. इन बातचीत में सभ्यतागत नजरिए, सामाजिक एकजुटता और आज की वैश्विक चुनौतियों पर साझा प्रतिक्रियाओं पर चर्चा की गई.

29 अगस्त को न्यूयॉर्क में भागवत का संबोधन

इसके बाद डॉ. भागवत ने इस सभ्यतागत संवाद को न्यूयॉर्क से टोरंटो और अब लंदन तक पहुंचाया है. 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में, AHEAD (अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग) के निमंत्रण पर उन्होंने अलग-अलग धर्मों और संप्रदायों के 175 प्रतिभागियों वाली सर्व-धर्म नेताओं की बैठक को संबोधित किया.

उन्होंने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में यूनिवर्सल वननेस सम्मेलन को भी संबोधित किया, जिसमें अमेरिका के 39 राज्यों और 853 शहरों से आए 6,000 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जो 250 संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. अमेरिका की यूनिवर्सिटीज के लगभग 250 छात्रों ने भी इस संवाद में हिस्सा लिया. सर्व-धर्म नेताओं की बैठक में पांच-सूत्रीय “कॉल फॉर एक्शन” प्रस्ताव अपनाया गया.

इसके बाद मोहन भागवत CHORD (कैनेडियन हिंदूज़ फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग) के निमंत्रण पर टोरंटो गए, जहां उन्होंने “हिंदू विश्व बंधु” सम्मेलन को संबोधित किया. इस सभा में कनाडा के सभी दस प्रांतों से 175 संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 2,000 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

कार्यक्रम के आखिरी चरण में लंदन पहुंचे भागवत

भागवत अपने तीन शहरों के शताब्दी आउटरीच कार्यक्रम के आखिरी चरण में लंदन पहुंचे. लंदन के इस बड़े कार्यक्रम का नेतृत्व और समन्वय ‘इंटीग्रल’ (Integral) ने किया है. यह UK में स्थित एक संस्था है जो UK के भीतर और UK व भारत के बीच बातचीत, सहयोग और लंबे समय के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए नेताओं और समुदायों को एक साथ लाती है. UK में स्थित 115 से ज़्यादा सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाएं भागवत का स्वागत करने और उनके दौरे के दौरान लोगों से जुड़ने के इस बड़े कार्यक्रम में सहयोग करने के लिए ‘इंटीग्रल’ के साथ जुड़ी हैं.

अपनी यात्रा के दौरान भागवत धर्म गुरुओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और अन्य प्रमुख हस्तियों से मिल रहे हैं. अलग-अलग धर्मों के लोगों से जुड़ने की अपनी कोशिश के तहत, उन्होंने विल्सडेन में श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे का दौरा किया है. वे लंदन में एक जैन मंदिर भी जाएंगे.

6 सितंबर 2026 को होगा “एकता का उत्सव”

6 सितंबर 2026 को “एकता का उत्सव” थीम के तहत सामुदायिक नेताओं के लिए एक स्वागत समारोह और सभ्यतागत संवाद होगा. इसकी शुरुआत ‘हिंदू स्वयंसेवक संघ UK’ (HSS UK) ने ‘इंटीग्रल’ के सहयोग से की है. HSS UK ब्रिटेन में 1966 में स्थापित एक हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था है. इस उत्सव में पूरे UK से 310 से ज़्यादा सामुदायिक संस्थाओं और संगठनों के शामिल होने की उम्मीद है.

लंदन का यह कार्यक्रम उस संदेश को आगे बढ़ाता है जिसे डॉ. भागवत अमेरिका से कनाडा होते हुए यूनाइटेड किंगडम तक लाए हैं. इस संदेश में निस्वार्थ सेवा और सामाजिक सद्भाव के RSS के अनुभव, और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी “दुनिया एक परिवार है” की उनकी सोच को साझा किया गया है.

प्रशांत द्विवेदी

प्रशांत द्विवेदी

प्रशांत कुमार द्विवेदी ने साल 2017 में अमर उजाला कानपुर से करियर की शुरुआत की. अगस्त 2019 से अक्टूबर 2021 तक अमर उजाला जम्मू कश्मीर में काम किया. इसके बाद एक साल अमर उजाला नोएडा में काम करने का मौका मिला. साल 2022 में आज तक डिजिटल में बतौर चीफ सब एडिटर ज्वाइन किया. सीएसजेएमयू कानपुर से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके प्रशांत सुरक्षा, कश्मीर मामले, क्राइम और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम करते हैं. वर्तमान में TV9 डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. नौकरी के अलावा खेल-कूद और किताबें पढ़ने में दिलचस्पी है. विशेष रूप से फिलासफी. इसके साथ ही ट्रेवलिंग पसंद है, खासतौर पर माउंटेन एरियाज में समय बिताना बहुत पसंद है. इन सबके बीच गांव, बेजुबानों और बुजुर्गों से विशेष लगाव रखते हैं.

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