Brent Crude Price: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष की वजह से तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में चिंता बढ़ी है।
brent crude rises to 100 dollar
- Published: 23 Jul 2026, 09:22 PM IST
- Last Updated: 23 Jul 2026, 09:22 PM IST
Brent Crude Price: कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला। गुरुवार शाम ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर तक पहुंच गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।
बाजार में निवेशकों को डर है कि अगर क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता और इससे कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती।
ब्रेंट क्रूड फिर 100 डॉलर पर
क्रूड की कीमतों में तेजी तब और तेज हुई जब यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके अलावा अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार 12वीं रात भी हमले किए जाने की खबरों ने मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ा दिया। इन घटनाओं ने दुनिया भर के तेल कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी और बाजार में सप्लाई को लेकर जोखिम का प्रीमियम बढ़ गया।
बाब-अल-मंदेब में भी बढ़ा संघर्ष
मौजूदा स्थिति में बाजार की सबसे बड़ी चिंता दुनिया के दो अहम ऊर्जा मार्गों को लेकर है। इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट शामिल हैं। इन दोनों समुद्री रास्तों से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती। अगर इन मार्गों पर किसी तरह की लंबे समय तक रुकावट आती, तो वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई कम हो सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता।
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट क्यों अहम है?
बाब-अल-मंदेब लाल सागर को गल्फ ऑफ ऐडन से जोड़ता है। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 12% वैश्विक व्यापार की आवाजाही इस क्षेत्र से जुड़ी है। हर साल करीब 4.1 अरब बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस रास्ते से गुजरते हैं। यहां किसी भी तरह की सुरक्षा समस्या से तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती।
वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता। इसके जरिए समुद्र के रास्ते होने वाले वैश्विक कच्चे तेल निर्यात का करीब एक-चौथाई हिस्सा गुजरता। ऐसे में होर्मुज या बाब-अल-मंदेब में लंबे समय तक बाधा आने से वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने के बाद अब बाजार की नजर इसके व्यापक आर्थिक असर पर है। अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती, तो पेट्रोल-डीजल और दूसरे ईंधनों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई फिर से बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता।
साथ ही, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक विकास पर भी दबाव पड़ सकता। केंद्रीय बैंकों के लिए भी स्थिति मुश्किल हो सकती है, क्योंकि उन्हें धीमी आर्थिक वृद्धि और लगातार बनी महंगाई के बीच संतुलन बनाना होगा।
(प्रियंका कुमारी)