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नहीं जलता चूल्हा, चूड़ा-दही से होता है गुजारा... सुपौल की जन्माष्टमी क्यों है खास? 100 साल से चली आ रही परंपरा

September 4, 2026

नहीं जलता चूल्हा, चूड़ा-दही से होता है गुजारा... सुपौल की जन्माष्टमी क्यों है खास? 100 साल से चली आ रही परंपरा

यहां जन्माष्टमी पर कृष्ण संग मां भगवती की आराधना.

Janmashtami 2026: बिहार के सुपौल जिले का बसबिट्टी कुंवर टोला अपनी अनोखी जन्माष्टमी परंपरा के लिए खास पहचान रखता है. यहां भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के साथ मां भगवती की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है. इतना ही नहीं, प्रतिमा विसर्जन के दिन पूरे गांव में किसी भी घर का चूल्हा नहीं जलता. ग्रामीण उस दिन चूड़ा-दही और फलाहार खाकर करीब एक सदी पुरानी इस परंपरा को निभाते हैं.

करीब 100 साल पुरानी है परंपरा

सुपौल जिला मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर उत्तर स्थित बसबिट्टी कुंवर टोला में हर साल जन्माष्टमी का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा करीब 100 वर्षों से चली आ रही है. पीढ़ी दर पीढ़ी ग्रामीण इस धार्मिक आयोजन को पूरी आस्था के साथ आगे बढ़ा रहे हैं. यहां जन्माष्टमी सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव तक सीमित नहीं है. आयोजन के दौरान राधारानी और मां भगवती की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जो इस परंपरा को दूसरे स्थानों से अलग बनाती है.

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प्रतिमा स्थापना के लिए करना पड़ता है इंतजार

पूजा समिति के अध्यक्ष शुभंकर कुंवर के अनुसार, यहां प्रतिमा निर्माण और स्थापना का अवसर मिलना भी विशेष माना जाता है. प्रतिमा स्थापित कराने की इच्छा रखने वाले ग्रामीणों को कई वर्षों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. इस वर्ष प्रतिमा निर्माण और स्थापना की जिम्मेदारी बसबिट्टी निवासी विजय सिंह ने ली है. विजय सिंह पटना में ठेकेदारी का काम करते हैं और इस साल के मूर्ति दाता हैं. ग्रामीणों के बीच प्रतिमा दान को बेहद सौभाग्य की बात माना जाता है.

Janmashtami 2026 (1)

विसर्जन के दिन नहीं जलता चूल्हा

बसबिट्टी कुंवर टोला की जन्माष्टमी की सबसे अनोखी परंपरा प्रतिमा विसर्जन के दिन देखने को मिलती है. वर्षों से चली आ रही मान्यता के अनुसार, उस दिन पूरे गांव और आसपास के इलाके में किसी भी घर का चूल्हा नहीं जलाया जाता. ग्रामीण इस दिन पका हुआ भोजन नहीं बनाते. लोग चूड़ा-दही, फल और अन्य फलाहार ग्रहण करते हैं. इसके बाद सभी लोग प्रतिमा विसर्जन यात्रा में शामिल होते हैं. ग्रामीण इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाते हैं.

विसर्जन यात्रा में जुटते हैं हजारों श्रद्धालु

प्रतिमा विसर्जन के दौरान बसबिट्टी और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ढोल-नगाड़ों और भगवान के जयकारों के बीच विसर्जन यात्रा निकाली जाती है. इस दौरान पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूब जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जन्माष्टमी और विसर्जन के दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल रहता है. आसपास के गांवों से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण आयोजन की रौनक और बढ़ जाती है.

पूजा समिति संभाल रही आयोजन की जिम्मेदारी

इस वर्ष जन्माष्टमी महोत्सव की व्यवस्था पूजा समिति संभाल रही है. समिति के अध्यक्ष शुभंकर कुंवर, सचिव पंकज कुंवर और कोषाध्यक्ष अरुण कुंवर आयोजन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. बसबिट्टी कुंवर टोला की यह जन्माष्टमी आस्था और परंपरा का अनूठा संगम है. भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के साथ मां भगवती की प्रतिमा स्थापित करना और विसर्जन के दिन पूरे गांव में चूल्हा न जलाना इस आयोजन को खास बनाता है. करीब एक सदी से चली आ रही यह परंपरा आज भी गांव के लोगों को एकजुट कर रही है और नई पीढ़ी तक अपनी धार्मिक विरासत पहुंचा रही है.

प्रियरंजन राठौड़

प्रियरंजन राठौड़

प्रियरंजन राठौड़ वर्तमान में TV9 भारतवर्ष में सुपौल जिला संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका सफर वर्ष 2010 में शुरू हुआ. शुरुआती दौर में उन्होंने मधेपुरा जिले से नक्षत्र न्यूज़ बिहार के साथ जुड़कर अपने पत्रकारिता जीवन की नींव रखी. इसके बाद सहरसा जिले से राज्यसभा टीवी के लिए कई वर्षों तक कार्य किया और क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों की रिपोर्टिंग में सक्रिय भूमिका निभाई. मूल रूप से वह सुपौल जिले के बसबिट्टी पंचायत के निवासी हैं. निरंतर बेहतर और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के माध्यम से समाज और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना ही उनका उद्देश्य है.

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