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मुरादाबाद में 100 से ज्यादा तेंदुओं ने मचाई दहशत: 22 दिन में तीन महिलाओं को खा गए, 20 को नोचा; DFO बोले- बाघ से कठिन इन्हें पकड़ना - Moradabad News

August 27, 2026

जिम कॉर्बेट के बफर जोन से सटी मुरादाबाद की सीमा में तेंदुओं की आवाजाही यूं तो आम बात रही है। लेकिन, तेंदुओं का जो खौफ बीते 22 दिनों से है, वैसे हालात कभी नहीं रहे। 22 दिन में तेंदुओं ने 3 महिलाओं को नोच-नोचकर मार डाला।

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20 से अधिक किसानों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इन घटनाओं से उत्तराखंड से सटे मुरादाबाद के करीब 50 गांवों के 1 लाख लोग खौफ में हैं। मंदिरों-मस्जिदों से लगातार एनाउंसमेंट करके किसानों से कहा जा रहा है कि वे खेतों पर न जाएं। डर में लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।

फॉरेस्ट ऑफिसर ने बताया कि जिले में 100 से ज्यादा तेंदुओं के होने का अनुमान है। वन विभाग के अधिकारी करीब 50 एक्सपर्ट्स के साथ इलाके में कैंपिंग और गश्त कर रहे हैं। जगह-जगह 29 पिंजरे लगाए गए हैं। अब तक 11 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं। थर्मल ड्रोन की मदद से तेंदुओं को ट्रैक करने की कोशिश भी जारी है। जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर इन गांवों में किस तरह का डर है, लोगों का क्या कहना है, पढ़िए पूरी रिपोर्ट-

वन विभाग ने 29 पिंजरे लगाए हैं, अब तक 11 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं।

वन विभाग ने 29 पिंजरे लगाए हैं, अब तक 11 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं।

तेंदुओं के बदले मूड ने फॉरेस्ट एक्सपर्ट भी हैरान

मुरादाबाद में अब तक पिछले 22 दिनों में हुईं घटनाओं में एक बात कॉमन है, तेंदुए बिना किसी उकसावे या दबाव के इंसानों की सीधा गर्दन दबोच रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, आमतौर पर वह ऐसा नहीं करते हैं।

मुरादाबाद के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) डॉ. विनय कुमार पांडेय कहते हैं- हम एक्सपर्ट की मदद से तेंदुओं के मिजाज को रीड करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल हमें ऐसा लगता है कि इंसान को अपने करीब आता देख तेंदुए ऐसा कर रहे हैं। यह उनकी दृष्टि से अपनी सुरक्षा में किया गया अटैक भी हो सकता है।

शहर और हाईवे के आसपास तेंदुए टहलते दिख रहे

मुरादाबाद में बीते 20 दिनों में वन विभाग एक शावक समेत 11 तेंदुओं को पकड़ चुका है। इसके बावजूद तेंदुओं के हमलों की घटनाएं रोज हो रही हैं। इससे इतना तो साफ है कि तेंदुओं की बड़ी तादाद जिले के जंगलों में टहल रही है। अब तो शहर और हाईवे के आसपास तेंदुए टहलते दिख रहे हैं। फॉरेस्ट ऑफिसर कहते हैं कि यहां 100 के करीब तेंदुए हो सकते हैं।

15 दिन पहले हाईवे किनारे तेंदुओं का झुंड देखा गया था।

15 दिन पहले हाईवे किनारे तेंदुओं का झुंड देखा गया था।

DFO बोले- यह तो तेंदुओं का पारंपरिक इलाका है

  • मुरादाबाद के DFO डॉ. विनय कुमार पांडेय कहते हैं कि उत्तराखंड से सटे इस इलाके में हमेशा से तेंदुए रहते आए हैं। पहले यहां घास के मैदान हुआ करते थे। काफी जंगल था, जहां किसानों की आवाजाही नहीं होती थी। मुरादाबाद गजेटियर का जिक्र करते हुए DFO कहते हैं कि तेंदुओं का यह पारंपरिक एरिया रहा है।
  • यहां तेंदुए पाए जाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन, अब घास के मैदानों की जगह गन्ने ने ले ली है। इससे तेंदुए गन्नों में घूम रहे हैं। DFO कहते हैं कि इस बार बारिश कम होने की वजह से बाढ़ नहीं आई है।
  • हर साल बाढ़ की वजह से लोगों का इन दिनों में गन्नों और जंगलों तक जाना बंद हो जाता था। इसलिए तेंदुओं के अटैक की घटनाएं भी कम होती थीं। लेकिन, इस बार बाढ़ नहीं आने की वजह से किसानों का खेतों में मूवमेंट बना हुआ है।
वन विभाग का कहना है कि तेंदुओं को पकड़ने के लिए टीमें लगी हैं। निगरानी बढ़ाई गई है।

वन विभाग का कहना है कि तेंदुओं को पकड़ने के लिए टीमें लगी हैं। निगरानी बढ़ाई गई है।

बाघ को पकड़ना आसान, तेंदुआ उतना ही मुश्किल

फॉरेस्ट एक्सपर्ट कहते हैं- एक बार बाघ को पकड़ना और उसके मूवमेंट को ट्रैक करना आसान है। लेकिन तेंदुआ अगर एक बार कहीं छुप जाए तो उसे ट्रैक करना मुश्किल है। क्योंकि किसी छोटी से छोटी चीज की ओट में भी तेंदुआ छुप सकता है।

तेंदुआ अपने शरीर को जमीन से बिल्कुल चिपका लेता है। इससे यदि खुले मैदान में भी वो किसी बेहद छोटी झाड़ी की ओट में भी जमीन से चिपक जाए तो सामने होने के बावजूद वो नजर नहीं आएगा। कई दिन तक पानी पीये बगैर भी वो छुपा रह सकता है।

फॉरेस्ट एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि शहर में भी सड़क किनारे किसी छोटे पत्थर या कबाड़ की आड़ में तेंदुआ जमीन से चिपक कर बैठक जाए तो दूर से ऐसा लगेगा कि कोई तस्वीर है। वो अपने सिर और गर्दन को भी जमीन से इस आकृति में चिपका लेता है कि इंसान को नजर न आए।

50 गांवों से आगे बढ़ रहा तेंदुओं का दायरा

तेंदुए की दहशत मुख्य रूप से उत्तराखंड से सटे मुरादाबाद के 50 गांवों तक फैली है। लेकिन अब यह दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। जिले के ठाकुरद्वारा और डिलारी थाना क्षेत्र के बाद अब कांठ और छजलैट इलाके में भी तेंदुए देखे गए हैं। इसके अलावा दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर मुरादाबाद से सटे इलाके में TMU अंडरपास में भी तेंदुआ देखा गया है।

महिलाओं ने क्या कहा, आगे पढ़िए-

मिथिलेश ने कहा- हम गांव वालों का जीवन खेती और पशुपालन पर निर्भर है, इसलिए हमें चारा लेने और खेतों में जाने के लिए भी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। वन विभाग से मांग की है कि तेंदुए को जल्द पकड़कर गांव को डर के माहौल से राहत दिलाई जाए।

मनीषा ने कहा- वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरों में चारा नहीं रखा जा रहा है, इसलिए तेंदुआ पिंजरे के आसपास तो आते हैं, लेकिन उसके अंदर नहीं जाते। वन विभाग के कर्मचारी मौके पर आकर निगरानी भी नहीं कर रहे हैं। गांव वाले खुद ही पिंजरों की व्यवस्था और निगरानी कर रहे हैं। हम सभी गांव वालों की यही गुहार है कि तेंदुओं को जल्द से जल्द पकड़ा जाए।

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