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मध्यस्थता कराने वाले पाकिस्तान ने अमेरिका से मांगे पैसे, 10 अरब डॉलर के मदद की लगाई गुहार

July 22, 2026

मध्यस्थता कराने वाले पाकिस्तान ने अमेरिका से मांगे पैसे, 10 अरब डॉलर के मदद की लगाई गुहार

शहबाज शरीफ और डोनाल्ड ट्रंप

गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी से जूझ रहे पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने एक बड़ा और चौंकाने वाला प्रस्ताव रखा है. ईरान और अमेरिका के बीच हालिया तनाव और संघर्ष के दौरान कथित तौर पर मध्यस्थता यानी ‘ब्रोकरेज’ की भूमिका निभाने के बाद, अब पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन से 10 अरब डॉलर (10 Billion Dollars) की भारी-भरकम वित्तीय सहायता की मांग की है.

यह मांग ‘बायलैटरल एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी’ के तहत की गई है. पाकिस्तान का मानना है कि अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो उसकी गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने यह अनुरोध अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के सामने रखा है. हालांकि, अब तक अमेरिका की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक मंजूरी या सकारात्मक संकेत नहीं मिला है.

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की सक्रियता

हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के दौरान पाकिस्तान ने खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की. पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस भूमिका के बदले उसे अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से आर्थिक सहयोग मिल सकता है. यह व्यवस्था पांच साल तक के लिए प्रस्तावित की गई है.

क्या है ‘बायलैटरल एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी’?

यह एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था है जिसके तहत अमेरिका किसी सहयोगी देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए डॉलर, मुद्रा स्वैप या वित्तीय गारंटी जैसी सहायता उपलब्ध कराता है. यदि पाकिस्तान को यह सुविधा मिलती है, तो उसके लिए बड़ी राहत होगी.

  • विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हो सकती है.
  • पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम हो सकता है.
  • आयात भुगतान और बाहरी कर्ज चुकाने में आसानी हो सकती है.
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों पर निर्भरता कुछ हद तक घट सकती है.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था क्यों संकट में है?

पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. देश अभी भी IMF के 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के तहत आर्थिक सुधार लागू कर रहा है. इस कार्यक्रम की शर्तों के तहत सरकार को टैक्स बढ़ाने, सब्सिडी कम करने और सरकारी खर्च में कटौती जैसे कई कठिन फैसले लेने पड़े हैं. इन कदमों का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है. महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती जीवन-यापन लागत को लेकर सरकार की आलोचना लगातार बढ़ रही है.

IMF और विश्व बैंक से भी उम्मीदें

पाकिस्तान को उम्मीद है कि अगप अमेरिका का समर्थन मिलता है तो विश्व बैंक, IMF और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से भी अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त करने में उसे आसानी होगी. इससे देश की वित्तीय स्थिति को कुछ राहत मिल सकती है.

क्या अमेरिका देगा मदद?

फिलहाल अमेरिका की ओर से पाकिस्तान की इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव पर विचार करेगा या नहीं.यदि अमेरिका इस तरह की सहायता को मंजूरी देता है, तो इससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को अल्पकालिक राहत मिल सकती है. वहीं अगर यह प्रस्ताव खारिज होता है, तो पाकिस्तान को अपनी आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए IMF और अन्य वैश्विक संस्थानों पर ही अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है.

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण भारत की लीडिंग डिफेंस पत्रकारों में से एक हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर अपनी सटीक रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जानी जाती हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने इंडिया टीवी, न्यूज़ 24, ज़ी न्यूज़, इंडिया न्यूज़, ईटीवी और रिपब्लिक भारत जैसे प्रमुख समाचार चैनलों में रिपोर्टर, एंकर, प्रोड्यूसर और खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है. सितंबर 2022 से अंजू निर्वाण टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह रक्षा मामलों की कवरेज का नेतृत्व करती हैं, भारत के सैन्य आधुनिकीकरण, नौसेना की प्रगति, मिसाइल प्रणालियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर कवरेज करती हैं. अंजू निर्वाण ने युद्ध क्षेत्रों से रिपोर्टिंग की है, अग्रिम पंक्ति के सैन्य अभ्यासों को कवर किया है और शीर्ष रक्षा अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं.

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