हरिद्वार में ऑनलाइन गेमिंग में कम पैसे लगाकर ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। यूट्यूब पर दिखे विनअड्डा ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट के विज्ञापन से शुरू हुआ मामला आखिरकार 1 करोड़ 77 लाख 53 हजार 960 रुपए की ठगी तक पहुंच गया। शुरुआत में
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ठगी का पता तब चला, जब रकम वापस नहीं मिली। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई तो इस मामले में एक के बाद एक कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।
आखिर यूट्यूब पर दिखे उस विज्ञापन के बाद ऐसा क्या हुआ कि एक व्यक्ति इतना बड़ा नुकसान कर बैठा? ठगों ने उससे संपर्क कैसे किया, उसे अपने भरोसे में कैसे लिया और रकम किस तरह बढ़ती चली गई? चलिए पूरी घटना सिलसिलेवार समझते हैं।
यूट्यूब पर विनअड्डा का विज्ञापन देखा, यहीं से शुरू हुआ मामला
2025 में हरिद्वार के व्यक्ति ने यूट्यूब पर ‘विनअड्डा’ नाम की ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट का विज्ञापन देखा। विज्ञापन में कम रकम लगाकर ज्यादा मुनाफा कमाने की बात कही गई थी। विज्ञापन देखने के बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से उसके व्हाट्सऐप पर संपर्क किया गया। बातचीत के जरिए उसे ऑनलाइन गेमिंग में पैसा लगाने के लिए तैयार किया गया।

कम रकम लगाने पर ज्यादा मुनाफे का भरोसा दिया
व्हाट्सऐप पर संपर्क करने वालों ने उसे बताया कि ऑनलाइन गेमिंग में रकम लगाकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। कम रकम में ज्यादा कमाई का लालच देकर उसे निवेश के लिए तैयार किया गया। इसके बाद वह उनके बताए तरीके से अलग-अलग माध्यमों से पैसे ट्रांसफर करने लगा।
रकम ट्रांसफर होती गई और आंकड़ा 1.77 करोड़ तक पहुंचा
शिकायतकर्ता ने अलग-अलग माध्यमों से लगातार रकम भेजी। इस तरह उसके खाते से कुल 1 करोड़ 77 लाख 53 हजार 960 रुपए ट्रांसफर हो गए। उसे उम्मीद थी कि गेमिंग से मुनाफा मिलेगा और उसकी रकम वापस मिल जाएगी।
लेकिन बाद में जब उसने अपना पैसा वापस लेने की कोशिश की तो रकम वापस नहीं मिली। इसके बाद उसे समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
रकम वापस नहीं मिली तो साइबर थाने में शिकायत
ठगी का पता चलने के बाद शिकायतकर्ता ने देहरादून के साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस ने उन खातों की पड़ताल शुरू की, जहां पैसा पहुंचा था
जांच के दौरान पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों और उनमें हुए लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जुटाए। मकसद यह पता लगाना था कि शिकायतकर्ता से ली गई रकम आखिर किन बैंक खातों में पहुंची।इसी जांच में एक बैंक खाता सामने आया, जिसमें शिकायतकर्ता से ठगी गई रकम का एक हिस्सा जमा हुआ था।
एक खाते में पहुंचे थे ठगी के करीब 14 लाख रुपए
पुलिस की जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता से ठगी गई रकम में से करीब 14 लाख रुपए इसी बैंक खाते में पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस ने इस खाते के लेनदेन की पूरी जानकारी खंगालनी शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो इस खाते से जुड़े लेनदेन ने मामले को और बड़ा बना दिया।
सिर्फ 4 महीने में खाते से हुआ 95 लाख रुपए का लेनदेन
पुलिस को पता चला कि इस बैंक खाते में महज चार महीने के दौरान करीब 95 लाख रुपए का संदिग्ध लेनदेन हुआ था। इसके बाद खाते के दस्तावेज और दूसरे साक्ष्य जुटाए गए। जांच में मिले इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने खाते के खाताधारक की पहचान की।

उत्तराखंड STF ने आज आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
खाताधारक निकला राजस्थान का रहने वाला
बैंक खाते के आधार पर एसटीएफ टीम राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के लाडनूं थाना क्षेत्र पहुंची। यहां से किशोर पुत्र मदन लाल (41) को गिरफ्तार किया गया। वह वार्ड नंबर-5, ऊंचा मगर बास का रहने वाला है।
पुलिस के मुताबिक, उसके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन में किया गया था।
अब ठगी के नेटवर्क की आगे की कड़ियां तलाश रही पुलिस
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे ठगी की रकम के लेनदेन को लेकर पूछताछ कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रकम उसके खाते में आने के बाद कहां भेजी गई और इस पूरे मामले में और कौन लोग शामिल हैं।


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