
के के मेनन की सीरीज का कमाल
Adarsh Baal Vidyalaya: ओटीटी की दुनिया में देसी कहानियों का डंका एक बार फिर से बज रहा है. प्राइम वीडियो की लेटेस्ट वेबसीरीज ‘आदर्श बाल विद्यालय’ ने रिलीज होते ही व्यूअरशिप के मामले में सुनामी ला दी है. ये शो इस वक्त ग्लोबल लेवल पर नंबर 1 नॉन-इंग्लिश सीरीज का ताज पहन चुका है. भारत के 87 प्रतिशत पिन-कोड्स में दर्शक इसे चाव से देख चुके हैं. पिछले दो सालों में प्राइम वीडियो इंडिया के लिए ये किसी भी ओरिजिनल शो का सबसे तगड़ा डेब्यू साबित हुआ है.
आखिर एक सुस्त हेडमास्टर और टूटे-फूटे स्कूल की इस कहानी ने नेशनल से लेकर इंटरनेशनल लेवल तक इतनी तगड़ी पकड़ कैसे बना ली? आइए जान लेते हैं इस सफलता के पीछे छिपे 5 कारण.
1. केके मेनन का ‘नेवर-सीन-बिफोर’ अवतार
अक्सर इंटेंस, गंभीर और खूंखार किरदारों में नजर आने वाले मशहूर एक्टर केके मेनन ने इस बार सबको चौंका दिया है. एक आलसी और जुगाड़ू हेडमास्टर के रोल में उनकी कॉमिक टाइमिंग इतनी गजब की है कि दर्शक हंस-हंसकर लोटपोट हो रहे हैं. सीरियसनेस से कॉमेडी का ये ट्रांजिशन शो की सबसे बड़ी यूएसपी बन गया है.
2. सीरीज का ‘देसी’ कनेक्शन
बिस्वपति सरकार, समीर सक्सेना और निर्देशक हिमांक गौर की तिकड़ी जमीनी स्तर की कहानियों की नब्ज पकड़ना जानती है. जिस तरह से कहानी का ताना-बाना बुना है, वो सीधे दर्शकों के दिलों से कनेक्ट करता है. इसकी सादगी में ही इसकी असली खूबसूरती छिपी है.
3. दिग्गज कलाकारों की पूरी फौज
सिर्फ लीड रोल ही नहीं, बल्कि सपोर्टिंग कास्ट ने भी शो में जान फूंक दी है. अर्चना पूरन सिंह, देवेन भोजानी, अभिमन्यु सिंह और नवीन कस्तूरिया जैसे मंझे हुए कलाकारों का एक साथ स्क्रीन पर आना एक ऐसा कॉकटेल तैयार करता है, जहां हर सीन में आपको हंसी के जोरदार पंच मिलते हैं.
4. सरकारी स्कूल वाली पुरानी ‘नोस्टैल्जिया’
कहानी का प्लॉट बहुत रिलेटेबल है. एक ऐसा स्कूल जहां कुछ भी सही नहीं चल रहा. बचपन में देखे गए सरकारी स्कूलों की कमियां, वहां का स्टाफ और गांव की राजनीति ये सब इतनी खूबसूरती और हल्के-फुल्के अंदाज में पिरोया गया है कि दर्शक खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करते हैं.
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5. बदलाव का इमोशनल टच
ये सीरीज सिर्फ एक खोखली कॉमेडी नहीं है. हेडमास्टर को सरकारी खर्चे पर ‘कैंब्रिज’ जाने का चस्का लगता है, और इसी लालच में वो स्कूल सुधारने का बीड़ा उठा लेता है. लालच से शुरू हुआ यह सफर कब एक खूबसूरत और जज्बाती बदलाव में बदल जाता है, यही बात विदेशी दर्शकों (240 से ज्यादा देशों) के दिलों को भी छू गई.
कुल मिलाकर, ‘आदर्श बाल विद्यालय’ ने ये साबित कर दिया है कि अगर देसी कहानी में मिट्टी की खुशबू और इमोशंस में सच्चाई हो, तो उसे दुनिया की हिट सीरीज बनने से कोई नहीं रोक सकता.

सोनाली नाईक
सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.
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